मेरा देश विश्व गुरु बन जाये

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चारो वेदो का ज्ञान सब पाये ,
मेरा देश विश्व गुरु बन जाये |
एक और है मेरी आखरी इच्छा ,
फिर से सोने की चिड़िया कहलाये ||

कुछ विदेशी बाहर से आये,
व्यापारी बनकर यहाँ आये |
उन्होंने मेरे देश को खूब लूटा ,
हम गरीब वे अमीर बन पाये ||

ले लो मेरे प्राणों की आहुति,
ये मेरा यज्ञ सफल हो जाये |
जो खंडो में विभक्त हुआ था ,
फिर से अखंड भारत हो जाये ||

चल रही है चारो तरफ कूटनीति,
युद्ध का बादल चारो तरफ मंडराये |
दे रहे है एक दूजे को युद्ध की धमकी,
कही विश्व में विश्व युद्ध न हो जाये ||

फिर कैसे विश्व शान्ति आये ?
जो एक दूजे के गले लग जाये |
छट जाये ये सब युद्ध के बादल ,
एक नया शान्ति सबेरा आये ||

छट सकते है ये युद्ध के बादल,
जब सब देश एक साथ आये |
स्वारथ को चोला छोड़ कर ,
शांति का सब बिगुल बजाये ||

अब भारत को आगे आना होगा ,
विश्व को शांति पाठ पढाना होगा |
जिससे युद्ध के बादल छट जाये ,
और भारत विश्व गुरु बन जाये |

और भारत विश्व गुरु बन जाये,
फिर से सोने की चिड़िया कहलाये |

#आर के रस्तोगी
गुरुग्राम (हरियाणा)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।