बरसो रे बदरा

0 0
Read Time59 Second
avinash tiwari
अब की बदरा ऐसे बरसो
बुझ जाय धरती की प्यास रे
उदासी हटे किसानों की
पूरी कर दो आस रे
धानी चुनरिया वसुंधरा ओढे
दमक उठे श्रृंगार रे
चातक बैठा जिस बून्द को
पूरी उसकी चाह रे
धरती माँ की अन्तस् से सूखी
जल धार की स्रोतें
छेद हजारों सीने पे जिसके
कैसे स्रोत न सुखें
उन छिद्रों को भर दो
अपनी प्रेम की फुहार से
जड़ चेतन जागृत हो
सृजन की रसधार से
उपवन सूखा मधुवन फीका
ताल तलैया सूखे हैं
जंगल हमने जला दिया
स्वार्थ के हम भूखे हैं
आशाओं के दीप जलाकर
उपवन फिर महकाओ रे
अब की बदरा ऐसे बरसो
उम्मीदों को सहलाओ रे
प्रेम सुधा बरसाओ रे।।
#अविनाश तिवारी
जांजगीर चाम्पा(छत्तीसगढ़)
 

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

बातो का सिलसिला

Thu Jun 20 , 2019
हर बात से ही बात की शुरूबात होती है। मिलने मिलाने से ही तो, आगे की मुलाकाते होती है। कौन ऐसा है जो बातचीत,  के बिना जीत सकता है। और इस मायावी समाज मे रह सकता है? हल्की सी मुस्कान से ही, इंसान आकर्षित हो जाता है। फिर धीरे से […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।