सत्य-पुंज

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shubha
रामायण में आदिकवि,करते हैं उल्लेख।
रामराज्य के रूप को,खुले नयन मन देख।।

ग्यारह हजार वर्ष तक,रहे अवध श्रीराम।
बन्धु-बान्धवों संग ही,बना लोक सुख-धाम।।

रावण रुपी छ्ल मरण,हरण दंभ सब पाप।
सत्य सुयश का मार्ग ही,दिखलाते प्रभु आप।।

सीता माता के हृदय,नाथों के हैं नाथ।
मर्यादा पालक प्रभो,रहे सर्वदा साथ ।।

अनुगामिनी अनघ सिया,अचल अजर श्रीराम।
त्रास मिटाने हेतु ही ,प्रकट हुए इस धाम।।

आगे की जो भी कथा,दीन सिया का हाल।
परित्याग वन-गमन सब,क्षेपक करें कमाल।।

अवधी भाषा में रची,पूज्य बनी संसार।
रामचरित मानस सभी, करते अंगीकार।।

किन्तु अछूता कब रहा,कोई रचनाकार।
समय झलकता सृजन में,कहे लेखनी- धार।।

पूज्य रहेगें सर्वदा, अजर अमर भगवान।
कण-कण-प्रतिक्षण व्याप्त हैं,रहे सभी को ध्यान।।

मंजुल मंगल मोदमय,अवध बिहारी रुप।
म्लान हृदय को दे रहे,सुख सब सुयश अनूप।।

राम राम श्री राम हे, जगत पिता हो आप।
सदा विराजो उर ‘अधर’,मेटो जग संताप।।

                                                                         #शुभा शुक्ला मिश्रा ‘अधर’

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।