हिंदी के प्रचार और विस्तार में सोशल मीडिया की भूमिका

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lali laxita
1.प्रस्तावना-
        अपनी मिट्टी की महक सी होती है अपनी भाषा। हिंदी हमारी मातृभाषा है ,और लिपि देवनागरी है । बेशक हम कितने ही देशों की भाषा सीख ले, परंतु जब तक हम हिंदी ,यानी अपनी भाषा अपनी मातृभाषा को सीखकर निपुर्ण नहीं हो जाते हैं, तब तक हमारी उन्नति संभव नहीं है ।आज हमारी हिंदी राजभाषा से विश्व भाषा बनने की एक उधर्व मुखी यात्रा पर है और वह दिन दूर नहीं जब हमारी हिंदी भाषा विश्व भाषा बन कर अपना परचम लहराएगी ।
2.हिंदी साहित्य की शक्ति इंटरनेटः-
        हिंदी साहित्य की शक्ति, हिंदी भाषा की मिठास और भारतीय संस्कृति इंटरनेट के माध्यम से पूरे विश्व में फैल रही है ।आज हिंदी के अनगिनत  कुंजीपटल ,कीबोर्ड इंटरनेट उपकरण आ चुके हैं। जिनके द्वारा हिंदी लिखना अब बहुत आसान हो गया है। बच्चे बड़े व बूढे इनका आसानी से प्रयोग कर रहे है ।कंप्यूटर और मोबाइल के लिए हिंदी भाषा में अनेक शिक्षाप्रद और मनोरंजक खेल प्रश्नोत्तरी एप ईबुक आदि है। वास्तव में कार्य करने वाला संभाषण स्व टंकक स्पीच टू टेक्स्ट वॉइस रिकॉग्नाइजेशन,  हिंदी को इंटरनेट के माध्यम के लिए सरल बनाने का निरंतर प्रयास चल रहा है माइक्रोसॉफ्ट  आदि सक्रिय हैं ,परंतु देवनागरी लिपि को बचाने का प्रयास अभी पर्याप्त नहीं है ।बहुत कुछ होना बाकी है। हिंदी समर्थित ईमेल अनुवाद टेक्स्ट टू स्पीच e-commerce cloud आधारित सर्विसेज का उपभोग करना अब जटिल नहीं रहा ।आजअपने आसपास की तकनीकी सेवाओं में भी हिंदी अपना स्थान बना चुकी है, जैसे एटीएम मशीनों पर देवनागरी में टाइप करने के उपाय ऑफलाइन ऑनलाइन के “जरिए “की कमी नहीं है ,और करीब-करीब हर  आधुनिक सॉफ्टवेयर पर हिंदी संबंधित कार्य किया जा रहा है।
3.सोशल मीडिया पर हिंदी की बहार ः-
        आज सोशल मीडिया पर हिंदी की बहार दिखाई दे रही है ।सोशल नेटवर्किंग में आज जिस अंदाज में विश्व में हिंदी को फेसबुक पर अपना लिया है वह अद्भुत है। आज महानगरों ही नहीं अपितु छोटे-छोटे और कस्बों तक के युवा, बुजुर्ग ,बच्चे फेसबुक पर आ धमके हैं ,और खूब सारी बातें हिंदी में कर रहे हैं ।व्हाट्सएप ने बहुत ही कम समय में बहुत ही बड़ी लोकप्रियता हासिल कर ली है। सोशल नेटवर्क हिंदी अपने आप में विलक्षण है ।हिंदी ,अंग्रेजी, देशज तकनीकी चित्रात्मक और अनौपचारिक शब्दावली बहुत ही मनभावन है। हिंदी के प्रचार और प्रसार में इस का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां हिंदी का एक नया रूप हमारे सामने आता है और हो सकता है कि यही सोशल मीडिया पर उपजे शब्दावली के वाक्य विन्यास भाषिक प्रवृत्ति आगे चलकर हिंदी भाषा पर कोई नया असर डाले।
4. हिंदी गूगल के साथ ः-
        आज भारत भी विकसित देशों की दौड़ में है ।यहां शिक्षा का स्तर भी पहले से काफी सुधार पर है। लोग तकनीकी चीजों का उपयोग निडरता से करने लगे हैं और इन सब को आसान बनाया है गूगल ने, एंड्रॉयड फोन ने । अब अपनी बात को रोमन भाषा में नहीं, बल्कि शुद्ध हिंदी में एक दूसरे के सामने ,दूर बैठकर भी कर सकते हैं ,चाहे लिखकर  या बोलकर  वे अपने विचारों को  एक साथ एक से अधिक लोगों तक भी पहुंचा सकते हैं। आज मोबाइल कंपनियां भी अपने उत्पाद को आम लोगों को ध्यान में रखकर बाजार में उतार रही है, उन्हें हिंदी टेक्स्ट इनपुट की सुविधा दे रही है। इससे हिंदी प्रेमियों को काफी सुविधा मिल रही है। सोशल मीडिया में एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम आज काफी लोकप्रिय हो चुका है। यह गूगल द्वारा शुरू किया गया एक मुक्त स्त्रोत है। इसके विकास को सही दिशा में  सू संगठित ढंग से आगे बढ़ाने का दायित्व गूगल का है ।निशुल्क और मुक्त स्त्रोत होने के कारण इसे कोई भी मोबाइल युक्ति “डिवाइस” निर्माता अपने उत्पाद में निशुल्क इस्तेमाल कर सकता है। यह अपने आप में शक्ति संपन्न होने के कारण यह बहुत ही तीव्र व सहज है ।विंडोज के रूप में नया ऑपरेटिंग सिस्टम भी जारी किया जा चुका है ।सोशल मीडिया के लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। सोशल नेटवर्किग अपने दोस्तों से जुड़े रहते हुए अपनी बात कहने का मौका देती है । हिंदी भाषा सोशल मीडिया के माध्यम से एक ही स्थान पर रहते हुए अपने विचारों को सारी दुनिया तक पहुंचाने का भी मौका देती  रही है। इस प्रकार सोशल मीडिया के साथ- साथ हिंदी अपने पंख फैलाकर विश्व  की ऊंची  व विस्तृत उड़ान पर है ।
5. हिंदी सहित सोशल मीडियाः-
         सोशल मीडिया इंटरनेट के माध्यम से एक वर्चुअल वर्ल्ड बनाता है ।जिसके उपयोग करने वाला व्यक्ति सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म फेसबुक व्हाट्सएप टि्वटर आदि का उपयोग करके अपने विचारों का आदान-प्रदान करके अपने लिए एक प्लेटफार्म तैयार करता है ।आज के आधुनिक नवीन युग में सोशल मीडिया लोगों की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है ।यह जनसंचार का माध्यम है। सोशल मीडिया के सहारे आज व्यक्ति अपने आप को किसी भी क्षेत्र में सामाजिक-सांस्कृतिक राजनीतिक आर्थिक रूप से समृद्ध बना सकता है। सोशल मीडिया के माध्यम से व्यक्ति अपने उत्पाद को कम समय में अधिक लोकप्रिय बना सकता है। यह बहुत ही तीव्र गति से होने वाला संचार माध्यम है । यह सभी वर्गों चाहे वह गरीब हो या अमीर शिक्षित हो या अशिक्षित सभी पहुंच में आता है। और यह संभव हो पाया है केवल और केवल हमारी हिंदी मातृभाषा के कारण। यदि इंटरनेट पर हिंदी भाषा के टंकण अथवा लेखन की सुविधा ना होतीतो इंटरनेट कभी भी अपना विस्तार नहीं कर पाता। आज इंटरनेट पर हिंदी जनसंचार का सबसे नया व तेजी से लोकप्रिय होता हुआ माध्यम है। इसकी पहुंच दुनिया के कोने कोने तक है और इसकी रफ्तार का तो कोई जवाब ही नहीं । इसमें सारे माध्यमों का समागम है। यह एक विश्वव्यापी जाल है ।इसके भीतर करोड़ों अरबों पन्नों की सामग्री जमा है। जिसमें से आप पल भर में अपने मतलब की सामग्री खोज सकते हैं। यह अंतर क्रियात्मक माध्यम है अर्थात आप इसमें मूकदर्शक नहीं है ।आप सवाल जवाब बहस में भाग ले सकते हैं, आप चैट कर सकते हैं ,इससे अपना ब्लॉग बनाकर सूचना, मनोरंजन ,ज्ञान और व्यक्तिगत तथा सार्वजनिक  संवादों के आदान प्रदान के लिए भी इस्तेमाल करते हैं ।इसका महत्व दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। आजकल ऑनलाइन रहकर आप कुछ भी नया आयाम स्थापित कर सकते हैं। इसने पढ़ने लिखने वालों तथा शोधकर्ताओं के लिए संभावनाओं के नए कपाट खोले है।
6 .उपसंहार ः-
         कोई भी भाषा प्रयोग व व्यवहार की सीडी चढ़कर ही अपने उद्देश्य को चरम तक पहुंचाती है ।आज हमारे हिंद हिंदुस्तान में बहुत से विभाग हिंदी भाषा को मुख्य रूप से अपना चुके हैं ।बहुत से कार्यालयों में हिंदी में ही कार्य किया जा रहा है ताकि हम अपनी मातृभाषा के प्रति अपना कर्तव्य निभा पाऐ । हमारी भाषा हिंदी है इसीलिए हिंदी भाषा के विस्तार से ही हमारे देश की उन्नति संभव है। आज हिन्दी तकनीकी भाषा के रूप में सफल सिद्ध हो रही है। व्यापार, वाणिज्य ,अर्थशास्त्र, चिकित्सा की भाषा के रूप में हिंदी सफल सिद्ध हो रही है। इन क्षेत्रों में भी हिंदी  की अच्छी- अच्छी पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं। जो हिंदी भाषा में ही इंटरनेट पर भी मौजूद है ।अब हमें रोमन या हिग्लिश लिखने की आवश्यकता नहीं है। हम कापी -पैन को छोड़कर किसी भी उपकरण के माध्यम से लिखकर व बोलकर हिंदी टाइप कर सकते हैं और अपने लेख तैयार कर सकते हैंव दूसरों के पढ़ सकते हैं ।अपनी बात कह सकते हैं ।पल भर में कहीं तक भी पहुंचा सकते हैं ।।
      यही है हिंदी सहित सोशल मीडिया -जो एक दूसरे के बगैर उन्नति का वह शिखर नहीं पा सकता ,जिसे दोनों साथ मिलकर पा सकते हैं और यह बात उपकरण बनाने वालों व इंटरनेट स्थापित करने वालों की समझ में आ चुकी है। अब समझना हमें है कि इसे शिखर से शिखर तक ले जाने के लिए शुद्ध हिंदी  का ही प्रयोग करें सोशल मीडिया पर! ताकि अन्य जनमानस जनमानस को भी हिंदी का प्रयोग सोशल मीडिया पर करने में सहायता मिल सके।
★यह है मेरा भव्य भारत ,
★इसे महान बनाना है !
★अपनी मातृभाषा को ,
★सोशल मीडिया के ,
★पंख लगा कर!
★देश -देश पहुंचाना है!!!!!!!
#डाँ.लाली लक्षिता
रोहतक (हरियाणा)
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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।