छुट्टी गर्मी की

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avinash tiwari
लो हो गयी छुट्टियां गर्मियों की
मन में जगी आस
अपनों से मिलने उत्सुक है
होगी मीठी बात
कुछ शादियों में जायेंगे जमकर धूम मचाएंगे
बच्चे नाना नानी को नाको चने चबाएंगे
दादा दादी से मिलकर सुनेंगे नई कहानी
टीवी होगा अपना बेट बल्ला  होगा जानी
नही घूरेंगे मम्मी पापा चलेगी अपनी मनमानी
छुपम छुपाई खेलेंगे अमरैया में झूमेंगे
तालाब में होगी तबडक तबडक
बड़े मजे से तैरेंगे।
नज़र न लगाना कोई छुट्टी पर
बचपन इसे तरसता है।
मिले गांव की मीठी महक
संस्कार हमे यहीं मिलता है।
सभी बच्चों बड़ों को गर्मी की छुट्टियां की
अनेकाधिक बधाई
#अविनाश तिवारी
जांजगीर चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।