दिल से कब मिलोगे  

Read Time0Seconds
sanjay
प्यार का रंग अब चढ़ाने लगा है ।
दिल अब मेरा भी मचलने लगा है।
न जाने अब कब, मुलाकात होगी।
और हमारे प्यार की शुरुबात होगी  ।।
दिल मेरा अब मचलने लगा है।
प्यार के लिए  ,तड़फ ने लगा है /
दिल पर ज़ख़्म, इतने गहरे है /
की हम को, खुद मालूम नहीं  ।
और खुदी पर, वार करते रहे //
लाश खुद बन गए, इस ख्याल से।
की वो, मेरे जनाजे पे आएंगे।
कम से कम दो, फूल तो चढ़ाएंगे।
अब इस से ज़्यादा उनके /
दीदार का इंतिज़ार क्या करे ?
आंखे थक गई है, अब इन्तेजार में ।
दिल पिघल गया है, तेरे प्यार में।
आकर एक घुट तो, अब पिला दो।
और दिल की ,बैचेनी को मिटा दो।।
मिलते हो जब, तो कहते हो ।
कि आज रहने दो।
दूर जब तुम होते हो, तो कहते हो ,
की कब जवा, दिलो को मिलवाओगे।
और जो लगी है, आग दिलो में /
उसे तुम कब बुझाओगे//
दो मचलते हुए, दिलो को कब  /
प्यार मोहब्बत ,तुम सिखाओगे।।

#संजय जैन

परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

नया वर्ष

Thu Apr 4 , 2019
न जाने कितने गये,आएँगे फिर से नए, इंसान बस  मनाता, कब  से  सु वर्ष है। रीत प्रीत और गीत,शासन व सत्ता नीति, मानवीय  हित  साध,  अब  से  सहर्ष  है। आन बान मय शान, देश भक्ति अरमान, मानवता  का सम्मान, जन से  उत्कर्ष है। विकास के भरम में,विज्ञान के चरम में, […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।