आगामी लोक सभा चुनाव और युवा

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shashank mishra

पूरा देश एक बार फिर लोकसभा चुनाव के लिए तैयार हो रहा है। चुनाव आयोग हो या विविध राजनीतिक दल सबके सब सक्रिय हो गये हैं। पक्ष और विपा सज रहे हैं अपनी अपनी तैयारियां हैं और अपनी अपनी रणनीति भी।भारत में राजनीति ही ऐसा क्षेत्र है जहां कोई किसी का स्थाई दुश्मन नहीं होता।कोइ्र कहीं भरी कभी भी किसी के साथ जा सकता है। नब्बे के दशक के बाद भारतीय राजनीति का जिस तरह से पराभव हुआ है उससे तो नीति और नियति की परवाह किये बिना कई दल  हाथ मिला लेते हैं। उन्हें न जनता की परवाह है और न उसकी अपेक्षाओं प्राप्त विश्वास की चिन्ता रहती है।साथ ही अपने व अपने दल के साथ हुए पूर्व में मान अपमान और व्यवहार से कुछ लेना देना है। बस चिन्ता है किसी तरह अपना सत्ता सुख बना रहे। अपनी करनी पर से कहीं परदा न उठ जाये। उन्होंने जो राजनीतिक वर्चस्व बना रखा है।उस पर कोई अधिकार न कर ले या वह प्रभावी हो जाये। वर्तमान लोकसभा चुनाव के पहले बहुत कुद ऐसा ही दिख रहा है।भागमभाग आरम्भ हो चुकी है। मुद्दों से अधिक विरोध के लिए विरोध और अपने अपने वर्चस्व का भाव अधिक दिख रहा है। इस सबसे देश को कितना बड़ा नुकसान हो सकता है। इसका अनुमान नहीं किसी को। साथ ही समाज की दिशा क्या होगी वह समय के साथ चल पायेगा या पीछे को लौटेगा।

भारत में चुनाव आयोग सभी तरह के चुनाव सम्पन्न कराता है। जीतने और हारने वाले अपने तरीके से उसकी व्याख्या करते रहते हैं। उसकी एक ही व्यवस्था कभी अच्छी हो जाती है तो कभी बुरी। ऐसा पिछले दिनों अनके प्रकार के चुनावों में ईवीएम को लेकर देश दुनिया ने देखा भी है।सत्ता मिली ईवीएम अच्छी सत्ता नहीं मिली ईवीएम खराब। ऐसा कोई नहीं करता कि इस्तीफा देकर पुनः चुनाव करवाये। या फिर बार-बार अन्धे बहरे की भांति उंगली न उठाये।

इस सबकी परवाह किये बिना चुनाव आयोग का अपना दायित्व और अधिक सजगता से निर्वहन करना पड़ेगा।मात्र चेतावनी की आदत को कार्यवाही का रूप देना होगा तभी उसकी निष्पक्षता के साथ साथ चुनाव में बनने वाले अनुशासन की डोर भी मजबूत होगी। साथ ही उसको अपने निर्णयों में तत्परता लानी होगी।जिससे अनावश्यक उंगली उठाने वाले मर्यादित हो पायेंगे।एक समय टी एन शेषन जी द्वारा स्थापित प्रभाव ऊपर से नीचे तक दिखेगा।

चुनाव आयोग के बाद सबसे अधिक जिम्मेदारी अगर किसी की बनती है तो वह है देश का युवा मतदाता। जिसके कन्धों पर न केवल देश का भविष्य है। अपितु उसका सही सोंच के साथ सही निर्णय देश के लिए एक अच्छा नेतृत्व तो देगा ही। उसके अन्दर एक अनचाही भय भी होगा कि एक गलत निर्णय  उसे अर्श से फर्श पर लाने काम करेगा।

किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत युवा होते हैं। भारत वह गौवशाली देश है जिसके पास एशिया में सर्वाधिक युवा हैं। यह युवा न केवल योग्य हैं बल्कि देश की वर्तमान दिशा व दशा को देा व समझ भी रहे हैं। इसलिए इस आने वाले लोकसभा चुनाव सर्वाधिक अपेक्षा इन्हीं से है कि यह सब अपना दायित्व का निर्वहन देश के लिए आगे बढ़ाने वाले पक्ष के लिए करेंगे। जाति वर्ग क्षेत्र आदि वादों को तोड़ अन्तिम व्यक्ति तक को विकसित करने का निर्णय लेंगे।यह निर्णय न केवल देश व समाज को सही दिशा देगा अपितु समय और विश्व के साथ कन्धे सा कन्धा मिलाकर चलने वाला निर्णय होगा।इससे पड़ोसी चीन पाकिस्तान तो और सोचने को विवश होंगे ही साथ ही विश्व परिदृश्य में भारत और गरिमा मय स्थान पा सकेगा। युवाओं का सही निर्णय उनके आस पास पड़ोस माता पिता आत्मीय जन  परिवारी जन सभी को अपने प्रभाव में लेगाऔर वह सभी भी इन्हीं की तरह बढ़ चढ़कर मतदान में भाग ही नहीं लेंगे।जागरूकता का परिचय दिखेगा।

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि आगामी लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग के साथ -साथ भारत के युवाओं की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है।जिससे ही देश की दशा व दिशा का निर्धारण होगा अतः युवाओं को लोकतंत्र के इस महायज्ञ में अपना दायित्व बड़ी गम्भीरता और सजगता निभाना चाहिए।

#शशांक मिश्र

परिचय:शशांक मिश्र का साहित्यिक नाम `भारती` और जन्मतिथि १४ मई १९७३ है। इनका जन्मस्थान मुरछा-शहर शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) है। वर्तमान में बड़ागांव के हिन्दी सदन (शाहजहांपुर)में रहते हैं। भारती की शिक्ष-एम.ए. (हिन्दी,संस्कृत व भूगोल) सहित विद्यावाचस्पति-द्वय,विद्यासागर,बी.एड.एवं सी.आई.जी. भी है। आप कार्यक्षेत्र के तौर पर संस्कृत राजकीय महाविद्यालय (उत्तराखण्ड) में प्रवक्ता हैं। सामाजिक क्षेत्र-में पर्यावरण,पल्स पोलियो उन्मूलन के लिए कार्य करने के अलावा हिन्दी में सर्वाधिक अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं को नकद सहित अन्य सम्मान भी दिया है। १९९१ से लगभग सभी विधाओं में लिखना जारी है। श्री मिश्र की कई पुस्तकें प्रकाशित हैं। इसमें उल्लेखनीय नाम-हम बच्चे(बाल गीत संग्रह २००१),पर्यावरण की कविताएं(२००४),बिना बिचारे का फल (२००६),मुखिया का चुनाव(बालकथा संग्रह-२०१०) और माध्यमिक शिक्षा और मैं(निबन्ध २०१५) आदि हैं। आपके खाते में संपादित कृतियाँ भी हैं,जिसमें बाल साहित्यांक,काव्य संकलन,कविता संचयन-२००७ और अभा कविता संचयन २०१० आदि हैं। सम्मान के रूप में आपको करीब ३० संस्थाओं ने सम्मानित किया है तो नई दिल्ली में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वरिष्ठ वर्ग निबन्ध प्रतियोगिता में तृतीय पुरस्कार-१९९६ भी मिला है। ऐसे ही हरियाणा द्वारा आयोजित तीसरी अ.भा.हाइकु प्रतियोगिता २००३ में प्रथम स्थान,लघुकथा प्रतियोगिता २००८ में सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति सम्मान, अ.भा.लघुकथा प्रति.में सराहनीय पुरस्कार के साथ ही विद्यालयी शिक्षा विभाग(उत्तराखण्ड)द्वारा दीनदयाल शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार-२०१० और अ.भा.लघुकथा प्रतियोगिता २०११ में सांत्वना पुरस्कार भी दिया गया है। आप ब्लॉग पर भी सक्रिय हैं। आप अपनी उपलब्धि पुस्तकालयों व जरूरतमन्दों को उपयोगी पुस्तकें निःशुल्क उपलब्ध करानाही मानते हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-समाज तथा देशहित में कुछ करना है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।