पाकिस्तान ने अलापा फिर पुराना राग।

0 0
Read Time4 Minute, 2 Second

sajjad haidar

पाकिस्तान ने फिर वही अपना पुराना राग अलाप दिया। पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान के सत्ता पर विराजमान होने से सीना पर शांति के रूप में देखा जा रहा था। परन्तु, ऐसा नहीं हुआ सत्ता परिवर्तन के बाद भी नए प्रधानमंत्री ने वही कार्य करना आरम्भ कर दिया जोकि, उनके पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों ने किया था। पुलवामा आतंकी हमले का पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान का बयान आया है जोकि, साक्ष्य माँगने का राग अलाप अलाप रहें हैं। यह वही पुराना राग है जिसे अब इमरान सरकार ने शुरू कर दिया है कि आप हमें साक्ष्य दीजिए हम कार्यवाही करेंगे। तो प्रश्न यह उठता है कि क्या, अबतक भारत ने जितने साक्ष्यों को प्रस्तुत किया तो उन साक्ष्यों पर पाकिस्तान ने कितना कार्य किया, पाकिस्तान ने भारत के द्वारा दिए गए हुए साक्ष्यों पर आतकंकियों के विरूद्ध कितना प्रहार किया।
ज्ञात हो कि पाकिस्तान के खुले राजनीतिक मंचों पर जहरीले आतकंवादी हाफिज़ सईद एवं मसूद अज़हर स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। पाकिस्तान के साक्ष्य माँगने का तर्क यह है कि जब पाकिस्तान आतकिंयों के साथ नहीं है तो इन आतंकवादी आकाओं को अपने मंच पर जगह क्यों देता है। पाकिस्तान का यह दोहरा चरित्र बहुत दिनों से चल रहा है अब यह दोहरा चरित्र नहीं चलने वाला। पाकिस्तान तत्काल भारत को इन आतंकी आकाओं को सौंपने का कार्य करे। जोकि, भारत के प्रति आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते रहते हैं। अब शब्दों के खेल में भारत को नहीं फंसना चाहिए। भारत के नेतृत्व से हम सब भारतवासियों की आग्रह है कि कब तक हम इन झूठे आश्वाश्नों के भरोसे अपने वीर जवानों की कुर्बानी देते रहेंगे। अतः हमें अब ठोस कार्यवाही करने की आवश्यकता है। भारत का नेतृत्व भारत के हित के लिए आवश्यक कदम उठाए भारत की जनता भारत की सरकार एवं सेना के साथ है। क्योंकि, बेगुनाह हमारे जवानों का खून बहुत बह चुका। यह खून कबतक बहेगा? हमें इस पर शीघ्र विचार करना चाहिए और तत्काल देश हित के लिए कदम उठाना चाहिए। भारत के हित के लिए अनेकों प्रकार के कदम एक साथ उठाने की आवश्यकता है। भारत सरकार को तत्काल राजनीतिक, कूटनीतिक, सैन्यशक्ति एवं अर्थव्यवस्था के माध्यम से प्रहार करने की आवश्यकता है। जिससे कि पाकिस्तान की कमर तोड़ी जा सके। पाकिस्तान अगर आतंकियों के खिलाफ वास्तव में कार्यवाही करने की बात करता है तो तत्काल कल ही हाफिज सईद एवं मसुद अज़हर को भारत के हवाले कर दे। यदि पाकिस्तान ऐसा नहीं करता तो भारत सरकार से पूरे देश वासियों की आग्रह है कि कदापि पाकिस्तान पर अब भरोसा न किया जाए। अब सीधे-सीधे आतकिंयों एवं आतकिंयों के आकाओं का विनाश किया जाए।

विचारक ।
#सज्जाद हैदर

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

दिल की बात 

Wed Feb 20 , 2019
आप से दूर हो कर, हम जायेंगे कहा, आप जैसा दोस्त, हम पाएंगे कहा / दिल को कैसे भी, संभाल लेंगे हम, पर आँखों के आंसू ,हम छुपायेंगे कहा // कुछ कह गए, कुछ सह गए, कुछ कहते कहते, वो रह गए../ मै सही, तुम गलत, के खेल में, न […]

नया नया

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।