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ajay prasad

धुलेंगे पाप क्या  शाही   स्नान से ?

बात करते हो बिलकुल नादान से ।
मोह,माया ,छल ,कपट,लोभ,हिंसा
छूट पायेगा क्या आज  इन्सान से ।
बचाना होगा खुद से  ही खुद को
नहीं आयेंगे फरिश्तें आसमान से ।
बेहद मुश्किल है जान लो दोस्तों
लड़ना अपने अन्दर के शैतान से ।
लाख़ कर लो इन्तज़ाम रुकने का
तय है सबका जाना इस जहान से ।
#अजय प्रसाद 
नालंदा(बिहार )
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http://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2019/02/ajay-prasad.pnghttp://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2019/02/ajay-prasad-150x150.pngmatruadminUncategorizedकाव्यभाषाajay,prasadधुलेंगे पाप क्या  शाही   स्नान से ? बात करते हो बिलकुल नादान से । मोह,माया ,छल ,कपट,लोभ,हिंसा छूट पायेगा क्या आज  इन्सान से । बचाना होगा खुद से  ही खुद को नहीं आयेंगे फरिश्तें आसमान से । बेहद मुश्किल है जान लो दोस्तों लड़ना अपने अन्दर के शैतान से । लाख़ कर लो इन्तज़ाम रुकने का तय है...Vaicharik mahakumbh
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