वर्तमान राजनीति

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rambahadur

राजनीति अब वोटों का खेल

कर दो वादे कुछ भी अनेक
जो कभी न पूरे होने वाले
मंहगाई की बात करने वाले
जितना चाहे बांट सको बांटो
चाहे खजाना खाली हो
बगिया तो रो ही सकती है
माली ही जब स्वार्थी हो जायेगा
भ्रष्टों का क्या बिगड़ेगा
जो अभी व्यवस्था है
सत्ता से चिपकना चाहें
भले मरने की अवस्था है
कब्र में लटके हुए हैं पांव अभी
चाह है अभी सत्ता पाने की
सत्ता पाना मोक्ष है जैसे
राह चाहे कैसी भी हो
गणित वोटों का कैसा भी हो
दम लेंगे हल करके ही
किसकी किसकी बात करोगे
किसी से नहीं है कोई कम
सांपनाथ और नागनाथ में
नहीं है कोई भी अंतर
अगर पता है अंतर तो
अकेला अंतर सोचकर देखो
ऊपर लड़ने वालों के
देख आओ उनके भीतर प्रेम
शायद समझ पाओ ये खेल
#राम बहादुर राय “अकेला”
एम.ए.(हिन्दी, इतिहास ,मानवाधिकार एवं कर्तव्य, पत्रकारिता एवं जनसंचार),बी .एड.
मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं स्वतंत्र पत्रकार,
बलिया (उत्तर प्रदेश)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।