समय बड़ा बलवान

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bhagat

समय-समय का फेर है,समय बड़ा बलवान,
समय समझ करते रहो,दान मान सम्मान ;
यही है बात पते की।

समझ चूकी पछताय नर,समय बड़ा बलवान,
समय साथ जो जन चले,खिले होंठ मुस्कान..
सुधर जा अब तो प्राणी।

समय भूली छल-बल करे,करे अशुभ जो काम,
ऐसे ही नर कर रहे,मानवता बदनाम ;
रखो पहचान जरा-सी।

राजनीति पंकित हुई,सब-कुछ रहा बनाव,
स्वारथ हावी हैं यहाँ,पग-पग मिलते घाव;
सुधारो ढर्रा भैया।

बने भूप भी रंक है,रंक बने हैं भूप,
समय पलटता ही रहे,कभी छाँव तो धूप;
समय कीमत पहचानो।

समय विकट आया यहाँ,बाढ़ खेत को खाय,
रक्षक ही भक्षक बने,अब है कौन सहाय;
रोक लो यहीं हवा को।

देखो श्रम भूला मनुज,आज मशीनी लोग,
कल को औषधि जो रहा,आज समय वह रोग ;
नष्ट ही होगा यूँ सब।

लालच चढ़ा बुखार मन,कैसे उतरे आज,
एक शेष दिखता नहीं,रोग न जिसे समाज ;
कहो क्या होगा आगे।

संगम करता है सदा,समय जाँच- पड़ताल,
कभी डाँट-फटकार तो,करता कभी निहाल ;
सदा हो जय संगम की।

                                                                         #भगत ‘सहिष्णु’

परिचय : भगत टेलर ‘सहिष्णु’ प्रतापनगर (राजस्थान)में रहते हैं और प्रतियोगी शिक्षण कथा प्रवचन का व्यवसाय करते हैं। आप हर प्रकार के लेखन में सक्रिय हैं।

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।