अधुनातन नारी

Read Time0Seconds
cropped-cropped-finaltry002-1.png
कोई भी प्रण कोई प्रतिज्ञा
इस युग में मैं नहीं करुँगी
अखिल विश्व का भार वहन कर
वसुंधरा मैं नहीं बनूँगी…
ऋषि पत्नी का शापित जीवन
शिला बनी जो भटकी वन वन
राम चरण रज प्रतीक्षारत
अहिल्या बनकर नहीं रहूँगी
कोई भी प्रण….
पांच पांडवों की भार्या बन
पांचाली सा कुंठित जीवन
भरी सभा में लज्जित होकर
अपनी पीड़ा नहीं कहूँगी
कोई भी प्रण….
आजन्म पतिव्रत कर धारित
कर न सकी सतीत्व प्रमाणित
धरती माँ की गोद समाकर
अब मैं सीता नहीं बनूँगी
कोई भी प्रण….
निज कर्त्तव्य का कर पालन
लखन गए भाई संग वन
प्रेषितपतिका सा उपेक्षित जीवन
उर्मिला होकर नहीं सहूँगी
कोई भी प्रण…
पाया उसने जो पति जन्मांध
आँखों पे सदा ली पट्टी बांध
पतिव्रता गांधारी बनकर
कोई प्रतिज्ञा मैं नहीं लूँगी
कोई भी प्रण….
लोक लाज तज बन गई जोगन
 मीरा के तो गिरधर मोहन
कुल की मर्यादा रखने को
मैं विष का प्याला नहीं पिऊँगी
कोई भी प्रण…
बिना कहे जब गए नाथ
रख भी न सके सुत शीश हाथ
रात्रि में त्याग दिया जिसको
वो यशोधरा बन नहीं जिऊंगी
कोई भी प्रण..
मैं तो हूँ नारी अधुनातन
खुद ही जीऊँगी अपना जीवन
अपने हिस्से का कोई क्षण
किसी और को मैं नहीं दूँगी
कोई भी प्रण….
#रश्मि शर्मा
 उदयपुर(राजस्थान)
 
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

अच्छा लगता है

Mon Jan 28 , 2019
तेरे ख़्यालों में रहना अब अच्छा लगता है । यादों के दरिया में बहना अच्छा लगता है ।। तेरे दिल में सांसें लेना अच्छा लगता है । इंतज़ार के पल पल सहना अच्छा लगता है ।। ख़ुशबू में तेरी महक़ना अब अच्छा लगता है । इश्क में तेरे बहकना अब […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।