विश्वभर में मनाया जा रहा अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस

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harish jain

आज का दिन बहुत ही खास है क्योंकि सबसे बड़े मानव अधिकार, सार्वजनिक जिम्मेदारी और रोजगार के साधन शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीय दिवस को धूमधाम से मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शांति और विकास में शिक्षा की भूमिका को महत्व देते हुए 24 जनवरी के दिन को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 दिसंबर, 2018 को नाइजीरिया के संकल्प को स्वीकार करते हुए यह घोषणा की है। इस प्रस्ताव को 193 देशों का समर्थन प्राप्त हुआ है। 193 देशों का समर्थन मिलने से हम दिन के महत्व को समझ सकते हैं।
दरअसल वैश्विक स्तर पर एसडीजी 4, संतुलित विकास के लक्ष्यों और भारत के विशेष संदर्भ में, संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार, मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून 2009 के लक्ष्यों तथा उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में इस दिन का बहुत अधिक महत्व है।

विश्व तथा विशेष रूप से विकासशील देशों में शिक्षा को परम अग्रता प्रदान करने के अनेक कारण हैं। आज के समय में भी विश्वभर में ऐसे करोड़ों बच्चे और युवा हैं जिन्होंने अभी तक स्कूल की दहलीज़ पर कदम तक नहीं रखा है। समावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सभी को शिक्षा तथा रोजगार के अवसर दिए बिना विश्व का कोई भी देश लैंगिक समानता को प्राप्त करने और गरीबी दुष्चक्र को तोड़ने में सफल नहीं हों पाएंगे।
पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे अब्दुल कलाम ने अपने विज़न 2020 की बात दोहराते हुए एक बार कहा था कि भारत अगले 16 वर्षों में विकसित राष्ट्र बनने की प्रक्रिया में है और शिक्षा के बिना यह संभव नहीं है। एपीजे अब्दुल कलाम प्रारंभिक शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, ग्रामीण शिक्षा, विकलांग बच्चों के लिए शिक्षा जैसे हर विषय को महत्वपूर्ण मानते थे और कहते थे कि समृद्धि और विकास के लिए शिक्षा सबसे ज़रूरी तत्व है।
आइये जानते हैं शिक्षा क्यों महत्वपूर्ण है-
शिक्षा समाज में व्यक्ति को सभ्य रूप से जीवनयापन करना सिखाती है।
शिक्षा के माध्यम से अच्छा रोजगार प्राप्त किया जा सकता है।
शिक्षा के माध्यम से देश में गरीबी तथा भूखमरी को दूर किया जा सकता है।
शिक्षा के माध्यम से ही देश की अर्थव्यवस्था को विकसित किया जाता है।
किसी भी देश के लिए शिक्षित जनसंख्या ही उसका सबसे बड़ा धन होती है।
शिक्षा के माध्यम से ही सामाजिक कुरीतियों को दूर किया जा सकता है।

भारत में शिक्षा से संबंधित कुछ योजनाएं
समग्र शिक्षा योजना
मिड डे मील योजना
साक्षर भारत
आरटीई अधिनियम
सर्व शिक्षा अभियान
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान
जेआरएफ आदि

शिक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण विद्वानों के विचार –
“ज्ञान वो सबसे शक्तिशाली हथियार है जिससे आप पूरी दुनिया बदल सकते है।” : नेल्सन मंडेला
“सच्ची शिक्षा के दो लक्ष्य हैं; एक बुद्धिमत्ता दूसरा चरित्र।”: मार्टिन लुथर किंग
“औपचारिक शिक्षा आपको जीवन यापन करने योग्य बनती है; स्व:शिक्षा आपको सफल बनती है।”:जिम रोहन
“शिक्षा की जड़ें कडवी हैं लेकिन फल बहुत ही मीठा है।”: अरस्तु
“जो कुछ भी हमने स्कूल में सीखा है, वो सब भूल जाने के बाद भी जो हमें याद रहता है, वो ही हमारी शिक्षा है।”:अल्बर्ट आइंस्टीन
छात्रों को प्रश्न जरूर पूछना चाहिए. यह छात्र का सर्वोत्तम गुण है। : कलाम

#हरीश जैन, दिल्ली
परिचय-
लेखक जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में शोधार्थी तथा राज्यसभा सचिवालय में कार्यरत हैं । समसामयिक विषयों पर लिखना इनकी रूचि है।

 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।