अंधविश्वास का मकडजाल

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aashutosh kumar
चंदू बडा दुविधा में था उसे समझ में नही आ रहा था कि आखिर वो क्या करे उसकी पत्नी की हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही थी।गाँव में अंधविश्वास का माहौल और झाड़-फूक तंत्र-मंत्र का सहारा उसके पत्नी के इलाज के लिए पर्याप्त नहीं थे। हलांकि गाँव के चँद झोला छाप डाक्टर तो देख चुके थे लेकिन वो भी उसे ठीक नही कर पाये। एक दिन मैं भी गाँव गया तो चँदू मेरा नाम सुनकर मुझसे मिलने आया दर असल चँदू और मैं गाँव में बचपन मे खूब खेला करते थे।लेकिन शहर आने पर संपर्क टूट सा गया फिर भी भाईचारा तो बना हुआ है।
मैने पूछा चँदू कहो क्या हालचाल है?
चँदू-सब ठीक है लेकिन एक समस्या है
मैने कहा बोलो!
चँदू- ने अपनी पत्नी के बारे में बताया!
मैने पूरी दास्ता सुनने के बाद उसे समझाते हुए कहा देखो चँदू !तुम्हारी पत्नी को किसी न्यूरो स्पेशलिष्ट (दिमाग के डाक्टर )से दिखाना होगा और वो बिल्कुल ठीक हो जाएगी।तुम शहर चले जाव वहाँ बडे डाक्टर से दिखा लो भगवान ने चाहा तो जल्दी ठीक हो जाएगी पर इन झाडफूक के झमेलो में मत पडो।चँदू को मेरी सलाह पसंद आ गयी अगले दिन चँदू शहर के लिए चलने से पहले मुझसे डाक्टर का पता और फोन करवाकर शहर चला गया।शहर में प्राथमिक जाँच और उपचार के बाद दवा शूरू हुआ जिसका लाभ उसकी पत्नी को मिलने लगा एक सप्ताह के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई  एक महीने की दवा लेकर वह घर आया ।घर आने पर वह मुझसे मिलने आया लेकिन मैं शहर आ गया था ।
करीब दो वर्षो के बाद आज मै फिर गाँव आया हूँ ।चँदू और उसकी पत्नी भी मिलने आयी मैने हँसते हुए पूछा क्यों चँदू झाडफूक करवानी है ?चँदू झेंप गया और कहने लगा हमलोग गाँव के लोग न जाने कैसे कैसे अंधविश्वास पाल रखे हैं।पता नही इस अंधविश्वास के चक्कर में कितने काल के गाल में समा जाते है और लोग नसीब को कोसकर भूल जाते है। जागरूकता और ज्ञान के अभाव में बीमारी लोगो को निगल जाता है और पता भी नही चलता।ऐसे हमारे देश में न जाने कितने चंदू हैं जो अंधविश्वास के भँवर में उलझकर अपनों को खो रहे या रोज नई मुसीबतों का सामना कर रहे। हलांकि बीते दशक से मीडिया,और सोशल मीडिया के माध्यम से तथा सरकार के स्तर पर भी काफी सराहनीय कार्य हुए हैं जिससे समाज मे जागरूकता आयी है ।सरकार के स्तर पर हेल्थ कार्ड,बीमा,और आयुष्मान भारत योजना का आरंभ हुआ है जिसका सही इस्तेमाल करने के लिए चंदू जैसे लोगो को जागरूक करना होगा ताकि वे समय पर अपना इलाज करा सकें और मिलने वाली योजनाओं का लाभ उठा सकें ।

“आशुतोष”

नाम।                   –  आशुतोष कुमार
साहित्यक उपनाम –  आशुतोष
जन्मतिथि             –  30/101973
वर्तमान पता          – 113/77बी  
                              शास्त्रीनगर 
                              पटना  23 बिहार                  
कार्यक्षेत्र               –  जाॅब
शिक्षा                   –  ऑनर्स अर्थशास्त्र
मोबाइलव्हाट्स एप – 9852842667
प्रकाशन                 – नगण्य
सम्मान।                – नगण्य
अन्य उलब्धि          – कभ्प्यूटर आपरेटर
                                टीवी टेक्नीशियन
लेखन का उद्द्श्य   – सामाजिक जागृति

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।