हमारा प्यारा मांडव

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gopal
मांडव उत्सव पर विशेष कविता………..      
कण-कण जिसका प्रेम  गाथा सुनाएं
प्राकृतिक सौंदर्य सबके मन को भाएं ।
विन्ध्यांचल  पर्वत  श्रंखला  पर बसा
माण्डव का गुणगान  सारा जग गाएं ।।
हिंडोला , जहाज महल देख मन हर्षाएं
चतुर्भुज श्रीरामजी दर्शन मांडव में पाएं ।
रूपमती महल से माँ नर्मदा के होय दर्शन
कांकडा खो,डायनासोर पार्क रोमांच जगाएं ।।
जामा मस्जिद , गुंबद , इमारतों  की कलाएं
वास्तु,नक्काशी जो  देखें  मंत्रमुग्ध  हो जाएं ।
नील कंठेश्वर महादेव के दर्शन से मिलें सुकून
इको पाईंट अपनी आवाज़ का जादू दिखाएं  ।।
मांडू का प्रसिद्ध मेवा खिरनी मन ललचाएं
सीताफल  की  बहार  भी  यहाँ  खूब आएं ।
बरसात  में  जैसे  बादल  खेलते हमारे संग
देख हरियाली,बहते झरनें दिल गदगद हो जाएं ।।
मांडू उत्सव में कलाकार दिखाते अपनी कलाएँ
कवि सम्मेलन , मीरा  की  जिरात रंग जमाएं ।
साहस , रोमांच से भरें खेलों  में दिखाते हुनर
चित्रकार चित्र बनाकर दिखातें इसकी सुंदरताएं ।।
तान  भरती   हवाएं  ,  गुनगुनाती  लताएं
सुरीले लोकगीत रुपमती की याद दिलाएं ।
म.प्र.के धार जिले का जो हैं हृदय  स्थल
आओं हम मांडव उत्सव धूमधाम से मनाएं ।।
# गोपाल कौशल
परिचय : गोपाल कौशल नागदा जिला धार (मध्यप्रदेश) में रहते हैं और रोज एक नई कविता लिखने की आदत बना रखी है।

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।