आशाओं के दीप जलेंगें

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sampada
मेधा जब भी मुखरित होगी
निजता का सन्दर्भ हटेगा,
चेतन जब भी जागृत होगा
अंतर्मन का क्लेश घटेगा,
सुरभित होगा मन का स्वर
मन से जन के मीत बनेंगें
आशाओं के दीप जलेंगे।
मन का कलुष भगायें यदि हम
क्षमाशीलता   तब       जागेगी,
सहिष्णुता की अलख जगेगी
औ    कटुता निश्चित भागेगी,
स्थिर होगा जन का मन जब
मानवता के मीत बनेंगे
आशाओं के दीप जलेंगें।
मानवता की कर्मभूमि पर
मानवता का बिगुल बजेगा,
दृष्टि परस्पर ता की शुभ हो
स्वार्थभाव का बल बि घटेगा,
घर-घर खुशियां ही फैलेंगी
नित्य प्रेम के गीत बनेंगें,
आशाओं के दीप जलेंगें।
जाति धर्म पर दृढ़ प्रहार से
ओछेपन की भित्ति गिरेगी,
क्षेत्र वाद पर दृढ प्रहार से
लोकतंत्र की शक्ति बढ़ेगी,
समरसता की ज्योति जलाकर
लोकतन्त्र की रीढ़ बनेंगें,
आशाओं के दीप जलेंगें।।।।।।।
#सम्पदा मिश्रा
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।