*मतदान हमारा नैतिक अधिकार* 

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paras nath

लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए हमें  अपना अधिकार और कर्त्तव्य जानना बहुत ही आवश्यक है । और इसकी पहली सीढ़ी है *मतदान* । पहले तो ये सुनिश्चित करना होगा की हमें मतदान प्रत्येक दशा में करना  है । तत्पश्चात यह तय करना होगा की किसको और क्यों अपना मत दिया जाय ?
‘लोकतंत्र’ जनता के लिए तथा जनता के द्वारा होता है । लोकतंत्र को सार्थक बनाने के लिये प्रत्येक अर्ह नागरिक को मतदान का अधिकार है इसको ऐसे समझ जा सकता है कि मतदान नेताओं का नकेल है । परंतु जागरूकता के अभाव में जनता अपने मताधिकार का प्रयोग पूर्ण रूपेण एवं सही नहीं कर पाती जिससे वही जनता पिसती दिख रही होती है । कथित प्रजा पालकों व शासकों के द्वारा जनता शोषित होती रहती है ।
सर्वप्रथम हमें सही लोगों को चुनने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग शत प्रतिशत करना होगा एवं सोच समझकर ही मतदान करना होगा । यदि हम गलत लोगों का चुनाव करेंगें को उसका खामियाजा हमें ही भुगतान पड़ेगा । और उस दुष्परिणाम का पूरा श्रेय हमें ही जायेगा क्योंकि हमने उनको अपना अमूल्य मत ऐसे घटिये नेतृत्व के हाथ में दिया । यदि हमने मतदान न देकर पल्लू झाड़ लिया तब तो सारे अनिष्ट का दोषी हम ही है । अतः हमें सोच समझ कर मताधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिये ।
एक बात जो धरातलीय पटल पर दिख रही है कि जो अपने देश की जनता है अधिकतर (आंकड़े प्रतिशत के नहीं है) बड़ी ही निरीह है ,अज्ञानता, अशिक्षा,गरीबी, निठल्लेपन के कारण ।
उसका मानना है कि मतदान से क्या मिलेगा ?
कुछ लोग इस पचड़े में नहीं पड़ना चाहते है ,वो कहते है छोड़ों भई !
कुछ कहते है जो भैया(चमचे) बतायेगें उन्ही को अपना मत देंगे ।
कुछ लोग बरगला लिए जाते हैं तो  कुछ के मतों को खरीद फरोख्त कर लिया जाता है । नेता भी समय का तकाज़ा भांफ कर जनता को लालच देकर व उनके मतों का सौदा कर देतें है । इस परिस्थिति के अप्रत्यक्ष दोषी जनता तथा उनके जागरूकता का अभाव  है ।
सभी अपने मत का सही प्रयोग करें , इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार जागरूक जनों द्वारा समर्पित भाव से करना होगा औपचारिकता मात्र नहीं क्योंकि भारतीय जनता की स्थिति किसी से छिपी नहीं है  ।
हमें अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिये। अपना मत अमूल्य है ।

जय लोकतंत्र    !!!                  जय भारत !!!

नाम-पारस नाथ जायसवाल
साहित्यिक उपनाम – सरल
पिता-स्व0 श्री चंदेले
माता -स्व0 श्रीमती सरस्वती
वर्तमान व स्थाई पता-
ग्राम – सोहाँस
राज्य – उत्तर प्रदेश
शिक्षा – कला स्नातक , बीटीसी ,बीएड।
कार्यक्षेत्र – शिक्षक (बेसिक शिक्षा)
विधा -गद्य, गीत, छंदमुक्त,कविता ।
अन्य उपलब्धियां – समाचारपत्र ‘दैनिक वर्तमान अंकुर ‘ में कुछ कविताएं प्रकाशित ।
लेखन उद्देश्य – स्वानुभव को कविता के माध्यम से जन जन तक पहुचाना , हिंदी साहित्य में अपना अंशदान करना एवं आत्म संतुष्टि हेतु लेखन ।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।