पुस्तक विमोचन कार्यक्रम सम्पन्न 

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पंचकुला (हरियाणा) |
बोहल शोध मंजूषा के सम्पादक व गुगनराम एजुकेशनल सोसाइटी के अध्यक्ष एडवोकेट नरेश कुमार सिहाग जी द्वारा लिखित पुस्तक ‘राधे मोहन राय की साहित्य साधना’ का भव्य विमोचन पंचकुला में प्रो.राधे मोहन राय जी, पंजाब के पूर्व राज्यपाल ले. जरनल श्री बी. के. एस. छिब्बर, पूर्व जज श्री प्रीतम पाल, हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष श्री वीरेन्द्र चौहान एवं बी. डी. कालिया हमदम के करकमलों से किया गया |
‘राधे मोहन राय की साहित्य साधना’ नामक यह पुस्तक श्री डॉ. नरेश सिहाग जी की नवमी कृति है | डॉ. सिहाग एक प्रतिष्ठित लेखक तो हैं ही, साथ ही साथ एक सच्चे समाज सेवक भी हैं | सामाजिक क्रिया-कलापों में सिहाग जी हमेशा बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं और निस्वार्थभाव से अपनी सेवाएं देते रहते हैं | डॉ. सिहाग जी अपनी संस्था गुगनराम एजुकेशनल सोसाइटी के माध्यम से शिक्षा के प्रति समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं | जिनमें शिक्षा प्रेमियों को विशेष लाभ प्राप्त होता है | श्री नरेश सिहाग जी ने अपने प्रेरणा स्रोत प्रो. राधे मोहन राय जी के जीवन और उनके लेखन पर पुस्तक लिखकर और उसका प्रकाशन कराकर शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही सराहनीय कार्य किया है |
#मुकेश कुमार ऋषि वर्मा 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।