हिंदी भाषा हमारी भाषा

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bharti vikas preeti
आधुनिकता से भरी दौड़ मे, भागते जा रहे हम।
राष्ट्रभाषा को छोड़ पीछे,आंग्ल को अपनाते जा रहे हम।
राष्ट्र भाषा का जन्मदिवस,आधी आबादी को याद नही।
वैलेंटाइन, रोज डे,और न जाने क्या-क्या नए दिन मना रही।
सम्मान से बोले अपनी भाषा,
तभी प्रसन्न होगी भारत माता।
कई बड़े कवियों के रचनाओं का संगम है हिंदी,
मीठी, सरल,सहज है हिंदी,सबके बातचीत का सार है हिंदी।
लेकिन ये कैसा प्रेम है,जिसका हम गुणगान कर रहे।
आते समय मे उसीको भूल रहे।
अंग्रेज़ी का पहनावा जो ओढ़,पढ़े लिखे कहलाए।
राष्ट्रभाषा का जो करे प्रयोग तो लज्जित बन जाए।
विदेशी बातों को बखूबी अपनाते जा रहे है हम,
फिर क्यों अपनी भाषा मे बोलना,इससे पिछड़ते जा रहे हम।
#प्रीती मोहनानी
साहित्यिक उपनाम -भारती विकास
स्थान-जमशेदपुर,झारखंड
शैक्षणिक योग्यता- एम. कॉम,एम. ए(हिंदी),बी.एड
प्रकाशन- साहित्यिक पीडिया मे प्रेक्षित
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।