ज्ञाननिधान

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punam katariyar
शिक्षक-दिवसविशेष……………..
आलोक-स्तंभ तुम, गुरु महान,
तुमको प्रणाम,कोटि प्रणाम।।
प्राप्य तुम्हें,प्रभु सेअमिट वरदान,
अनगढ़ माटी को गढ़ते, दे ज्ञान
क्षुधातुर मेधा हो जब हकलान,
कराते तुम निरंतर अमृतपान।
तुमको प्रणाम, कोटि प्रणाम।।
छा जाते हो बन अरूण तिग्म,
तिमिरमय  हमारे  जीवन  में.
सौरभ -सा  रच -बस गए हो,
युग-युग से हमारे अंतस्थल में.
छात्र जीवन के अभिमान तुम,
तुमको प्रणाम, कोटि प्रणाम।।
 शब्द  कम पड़ जाते है,
अव्यक्त भाव रह जाते हैं.
उऋण नहीं हो सकते हैं ,
बस,इतना ही कह पाते हैं.
संपूर्ण-जगत् के ज्ञाननिधान,
जीवन को देते आकार तुम
तुमको प्रणाम, कोटि प्रणाम।।
#पूनम( कतरियार)
नाम-   पूनम (कतरियार)
जन्म-स्थान :हजारीबाग(झारखंड)
शिक्षा–   एम.ए.(हिन्दी साहित्य)
संप्रति  –  लेखन
पता   –   पटना(बिहार)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।