इंसाँ बनाया आपने

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मेरी तुतली बोली को
बस माँ समझती थी मेरी
लेकिन मैने जो भी बोला
 समझा हमेशा आपने
मुझको अच्छे और बुरे का
फर्क था आता नहीं
आप ही थे वो कि सब
मुझको सिखाया आपने
मुझको जब भी ठेस पहुंची
थी किसी की बात से
अपनी मीठी सी बातों से
मुझको बहलाया आपने
मैं जहां भी राह भटकी
था सम्भाला आपने
जब कभी दोराहे पर मैं
थी परेशां क्या करूं
राह का बन दीप मुझको
सब सुझाया आपने
अपने भावों की सदा
खुशबू मुझे दी
और फूलों सा मेरा
जीवन सजाया आपने
हैं सदा निस्स्वार्थ बांटे
हमको वो अनमोल से
ज्ञान के सागर से जो
मोती चुने थे आपने
आपके एहसान कैसे हम
उतारेंगे भला
मां ने तो बस जन्म दिया
इंसाँ बनाया आपने
इक समय था बोलना भी
था मुझे आता नहीं
मेरी चुप्पी को बुलन्द
आवाज बनाया आपने ।
आपके एहसान कैसे
हम उतारेंगे भला
माँ ने तो बस जन्म दिया
इंसाँ बनाया आपने।
#मंजु सिंह
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।