कर्ज शहीदों का

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garima sinh
धधकने लगी हैं चमन ये फिजायें,
कि ऐसे में हम मुस्कुराएँ तो कैसे!
वतन जल रहा है पतन की अगन में,
अगन ये पतन की बुझाएं तो कैसे!
है अभिशाप जैसी हुई राजनीति,
इस अभिशाप से मुक्ति पाएं तो कैसे!
नही अब धरा पर भागीरथ भी कोई,
धरा धार गंगा की लाएं तो कैसे!!
बड़ी ही तपिश है धरा पर पवन में
तपिश ये पवन की मिटाएँ तो कैसे
धधकने लगी ये चमन ये फिजायें
कि ऐसे हम मुस्कुराएँ तो कैसे……….!!
ये जाति धरम का जहर घोल करके,
ये नेता बड़े चैन से जी रहे हैं!
बनी है सदा मूर्ख जनता हमारी
ले शिव रूप सारा जहर पी रही है!
हुआ ना भला फूंक कर घर किसी का ,
ये बदले की ज्वाला बुझाएं तो कैसे!!
धधकने लगी ये चमन ये फिजायें
कि ऐसे में हम मुस्कुराएँ तो कैसे………!!
बने गर जो दुश्मन ये दुनियां हमारी ,
तो दुनिया से लड़ने की कर लें तैयारी!!
ये अपने हैं अपनो से कैसी लड़ाई
यही बात सबको बताएं तो कैसे!!
धधकने लगी ये चमन ये फिजायें
कि ऐसे में हम मुस्कुराएँ तो कैसे………!!
जो दिन रात सीमा पे देते हैं पहरे नमन एक उनको हृदय कर रहा है
जो बाँधे कफ़न मर मिटे हैं वतन पे
है हरदम तिरंगे की लाज बचाई
हृदय कर रहा है करुण गान अब तो
न उनकी शहादत भी कुछ काम आई
धधकनेलगी ये चमन ये फिजायें
कि ऐसे में हम मुस्कुराएँ तो कैसे…….
ये बिन बात की जो लड़ाई मची थी,
जिसमें माँओ ने लाखों ललन खो दिया है
द्रवित कण्ठ है और नम हैं ये आँखे,
नमन है वतन पर मिटे हर ललन को ,
शहादत ह्र्दय से मिटाएं तो कैसे!!
धधकने लगी ये चमन ये फिजायें
कि ऐसे में हम मुस्कुराएँ तो कैसे !!
वतन जल रहा है पतन की अगन में,
अगन ये पतन की बुझाएं तो कैसे!!
#गरिमा सिंह
परिचय- 
नाम-  गरिमा अनिरुद्ध सिंह
साहित्यिक उपनाम-मधुरिमा
राज्य-गुजरात
शहर-सूरत
शिक्षा- एम ए प्राचीन इतिहास
कार्यक्षेत्र-शिक्षण
विधा – हास्य ,वीर रस ,शृंगार
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।