स्वाधीनता का 71वां साल 🇮🇳*

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स्वतंत्रता शब्द ही ऐसा है जिसमे एक उमंग छुपी है खुल के जीने के मायने, खुल के अपनी बात कहने की स्वतन्त्रता,विचारो को अभिव्यक्त करने की छूट,लिखने की छूट, पढ़ने की छूट,अपने आप को साबित करने की छूट ,हर अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की छूट—-कुल मिला के स्वतंत्रता किसी भी राष्ट्र ,व्यक्ति के जीवन मे बहुत अहमियत रखती है
71 वर्ष हो गए हमारी स्वतंत्रता को;लेकिन क्या हमारी ये स्वतंत्रता सही मायने में स्वतंत्रता है ?
इन 71 सालों में भारत दुनिया की उभरती शक्ति के रूप में सामने आया है। इसमें कोई दो राय नहीं सन 1947 में जो भारत हम देशवासियो को मिला था उस भारत को अंग्रजो ने,अफगानों ने, मुग़लो ने बहुत लूटा खोसा था। उसके पश्चात भी हमारा भारत पूरी दुनिया के सामने उभर के आया ।
आज कई जन कहते है कि 71 साल में देश ने कुछ नहीं किया जब हम हम देश के विकास की बात करते है, या बड़े गर्व से साइंस और तकनीकि की बात करते है या राकेट छोड़ने और चाँद पर या मंगल पर जाने की बात करते है, तो सवाल यह है कि हम उस समय किस देश की बात कर रहे होते हैं ??
क्या इसी एक देश के भीतर बसे दूसरे देशों पर भी इन उपलब्धियों का कोई असर पड़ता है ?
जी हाँ हम उस देश में बसते है।
जहाँ एक विकसित देश बसता है, जहाँ एक विकासशील देश बसता है, जहाँ एक भूखा नंगा देश बसता है।
सही मायने में देखा जाए तो हम स्वतंत्र है; लेकिन स्वतंत्रता के मायने हम अभी भी नही समझ पाये।
आज देश में आरक्षण बहुत बड़ा ज़हर है। कई लोग आरक्षण की वजह से ग़ुलाम से बन गए हैं।
आरक्षण की वजह से देश में कई प्रतिभाएं नाकारा रह जाती है। जिनकी वजह से देश तरक्की कर सकता हैं।
जिस दिन देश में बने नियम कानून सभी के लिए समान होंगे;
तब लगेगा देश स्वतंत्र है  क्योंकि अगर एक व्यक्ति को सब कुछ करने की छूट हो और किसी अन्य को कुछ भी नहीं करने की तो फिर कैसी स्वतंत्रता।
हम  जब स्वतंत्रता को स्वछंदता मान लेते है; तो हमसे बड़ी भूल हो जाती है। हर व्यक्ति के जीवन में दो पहलू होते हैं कर्तव्य और अधिकार ध्यान देने वाली बात ये है कि कर्तव्य पहले आता है, अधिकार बाद में।
हमारी स्वतंत्रता का मतलब है। अपने कर्तव्यों के प्रति सम्पूर्ण रूप से समर्पित होना।
हम स्वतंत्र है। यह शाश्वत सत्य है, पर हमारे साथ साथ हर व्यक्ति उतना ही स्वतंत्र है जितने हम, हमें अपनी स्वतंत्रता का उपयोग करने का पूर्ण अधिकार है लेकिन वहाँ तक जहाँ तक हमारी स्वतंत्रता किसी और की स्वतंत्रता में व्यवधान न उत्पन्न करे।
यहाँ से शुरू होता है हमारा कर्तव्य। हमें अपनी स्वतंत्रता का उपयोग करते हुए औरों की स्वतंत्रता का भी पूरा ख्याल रखना है।
अत: हमारी समझ से स्वतंत्रता का मतलब है जियो और जीने दो हमारे युवा स्वतंत्रता के सही मायने नहीं पहचान पा रहें हैं।
स्वतंत्रता सिर्फ तीन रंगों तक सीमित रह गयी जिसे 71 वर्षो से एक पहिया ढो रहा है। कुछ सालों में स्वतंत्रता सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी को शॉपिंग मॉल में ही नजर आएगी;अगर हम सही स्वतंत्रता को नहीं पहचान पाये।
एक देश को आगे बढ़ने में युवा की मेहनत और एक बुजुर्ग का ज्ञान बहुत जरूरी है । हम अपने घर में ही देख ले हम युवा अपने घर के किसी भी कार्य में मेहनत करते है। हमारे बुजुर्ग हमारा मार्ग दर्शन करते है तब जा के कार्य सफल होता है।
भारत को भी दुनिया का सबसे खूबसूरत राष्ट्र बनाने में यही तरीका अपनाना पड़ेगा। फिर हम कह पाएंगे हम एक स्वतंत्र देश के नागरिक है जहां हर व्यक्ति को सामान अधिकार है ।
सन 1947 में जब भारत आज़ाद हुआ। उस वक़्त देश की हालत दयनीय थी। स्वतंत्रता के पश्चात कुछ महीनो तक देश को ये समझने में लग गया कि करना क्या है? क्योंकि सैकड़ो रियासतों को जोड़ के एक देश बना था।  सबको साथ लेकर चलना था। देश ने इसमें सफलता हासिल भी की है।
आज हमे खुश होना चाहिए की हम गर्व से कह सकते है कि हमारा भी एक देश है। मैं ये नहीं कहता की परफेक्ट है। कई खामियां भी है; लेकिन जिस तरह कई लोग देश की सिर्फ बुराई करते है कि भारत में कुछ नहीं रखा।
क्या अन्य सभी देश भारत से ज्यादा विकाशशील है ? क्या उन देशों में सिर्फ अच्छाई है बुराई नहीं है ??
हमें आगे बढ़ना है। नकारात्मक सोच के साथ आगे नहीं बढ़ सकते हम।
स्वतंत्रता को अगर सही मायने में सफल साबित करना चाहते है; तो देश को अपना युद्ध स्वयं से लड़ना है। बीते हुए कल से आने वाले कल को और बेहतर बनाना है।
आज कई लोग कहते फिरते है। सेना के जवान को देखो वे हमारे लिए अपनी जान की बाजी लगा रहे है; आप है की देश को कोस रहे है। कई तरह की बातों की तुलना सेना के सिपाही से कर देते है । ये नहीं कि तुलना नहीं करनी चाहिए; लेकिन किसी भी चीज़ को हम सीमा के बाहर करते है तो उसके प्रभाव खत्म होने की स्तिथि में हो जाते है।
हमारे देश की सेना में 20 लाख से ज्यादा सिपाही है। मतलब 20 लाख परिवार के लोग सैनिक का महत्व जानते है ।उनके रिश्तेदार भी है तो ये आंकड़ा तकरीबन आधे मुल्क के लोगो से जुड़ जाएगा। लेकिन कुछ अनपढ़ लोगो की वजह से हर बात में उनका नाम जोड़ना उनके महत्व को घटा रहा है।
हमें हमारी सेना और सैनिक का सम्मान करना चाहिए मेरा इतना ही कहना है व्यापारी,कर्मचारी आम नागरिक, इत्यादि कई लोगो से सेना की तुलना करना बंद करे । सब का अपना अपना महत्व है और सबके महत्व से जुड़कर एक देश बनता है ।
आइए हम सही मायने में स्वतंत्रता को पाये। देश को सही दिशा में ले जाने के लिये अपने बुजुर्गों से विचार विमर्श करें। अपने युवाओं से कर्मठ कार्य करने को कहें।
अपने आने वाली पीढ़ी का सही मार्ग दर्शन करें।
तब जाकर हम सच्ची स्वतंत्रता पाएंगे और एक सफल देश के सफल नागरिक कहलायेंगे।
मनोरमा जैन

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।