घर

0 0
Read Time1 Minute, 2 Second
shalini jain
घर जो कभी जगमगाता था रौशनी से ,आज खंडर सा वीरान है
उसमे रहने वाला कुछ इस तरह से सोचता है। . . . . . . . . . . . . . . . ….. . . . . ..
आज तू खड़ा वीरान है !
खंडर बना तुझमे में न जान है !
जीता था तू जब मै तेरा हिस्सा हुआ करता था
जगमगाती थी बिजलियाँ
हर दिन दीवाली सा हुआ करता था
आज तू खड़ा वीरान है
तुझमे न जान है
देखा है तुझे जीते हुए मैने कुछ इस तरह
कितनी खुशिया और दुःख बाटे हमने साथ है
तू एक घर नहीं
मै और तू आत्मा और जान है
कभी सुख दुःख के थे साथी हम
आज तू भी तन्हा मै भी तनहा
दोनों की छीन गयी जान है
आज भी तेरे हर कोने का अहसास ज़िन्दा है मेरे वजूद में
आज भी तेरे संग जीने की आस है मेरे दिल में u
देखा है तुझे। …. ….. …….. ………
#शालिनी जैन

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

दर्द का रिश्ता

Tue Jul 24 , 2018
सुबह के पांच बजने वाले थे । तभी गहरी नींद में सो रहे रमेश के फोन की घण्टी घनघना उठी । कुछ ही पल बाद रमेश ने अलसाते हुए फोन देखा तो कोई अपरिचित नंबर दिखा । उसने सोचा इतनी सुबह भला किसका फोन हो सकता है , पर यह […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।