अब मैं गुमशुदा होना चाहता हूं

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sushil duggad
जी लिया मैं बहुत दुनिया के लिए,
अब अपने लिए जीना चाहता हूं ।
ऐ  जिंदगी चल दूर बहुत दूर कहीं,
अब  मैं गुमशुदा होना चाहता हूं ।
देखी मोहब्बतें, नफरते रिश्तों की,
देखी दुनिया की दुनियादारी भी ।
देखी मतलबी, फरेबी जालसाजी,
देखी यारी ईमान और खुद्दारी भी।
उलझी  है जिंदगी हर उलझनों में,
अब सबसे जुदा होना चाहता हूं ।
ऐ जिंदगी चल दूर बहुत दूर कहीं,
अब  मैं गुमशुदा होना चाहता हूं ।
रंग  चुकी  है  कई रंगों में जिंदगी,
हर   रंग  अपना  रंग  जमाते  हैं ।
रंग  बदलती  इस दुनिया में देखा,
सब अपना-अपना ढंग बताते हैं ।
रंगीन बनके जी ली बहुत जिंदगी,
अब रंगों से विदा होना चाहता हूं।
ऐ जिंदगी चल दूर बहुत दूर कहीं,
अब  मैं गुमशुदा होना चाहता हूं ।
दौड़ा  बहुत  जिंदगी में दूर तलक,
हर मौसम को मैंने ललकारा था ।
कहीं  धूप छांव तो कहीं रात दिन,
हर  मंजर  को  मैंने स्वीकारा था ।
जीता रहा मैं मर के औरों के लिए,
अब खुद पे फिदा होना चाहता हूं।
ऐ  जिंदगी चल दूर बहुत दूर कहीं,
अब  मैं  गुमशुदा होना चाहता हूं ।
हासिल  हुए  हर ख्वाब जिंदगी के,
हर  मंजिल को मैंने ‘स्पर्श’ किया ।
बढ़ते  रहे कदम बस राहों में आगे,
पग  पग जिंदगी ने उत्कर्ष किया ।
नहीं ख्वाहिश कोई और जिंदगी में,
खुशी से अलविदा होना चाहता हूं।
ऐ  जिंदगी  चल दूर बहुत दूर कहीं,
अब  मैं  गुमशुदा  होना चाहता हूं ।
#सुशील दुगड़ “स्पर्श”
अंकलेश्वर(लुहारिया)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।