बेटियां,,,

Read Time0Seconds

sachin

मैं बेटी हुं बेटी होना देखो कैसे श्राप हुआ,
ऐसा लगता है जैसे मेरी मां से कोई पाप हुआ,
क्यूं मेरे पैदा होते ही दादी ने मुहं फुलाया था,
क्यूं ना लड्डू बांटे थे, क्यूं बाबा ने मुंह छुपाया था,,
क्यूं मां की ममता भी मौन हुई क्यूं पिता को गुस्सा आया था,,
ऐसा लगता था जैसे घर में कोई अभिशाप हुआ,,,
मैं बेटी हुं बेटी होना देखो कैसे श्राप हुआ,,
बेटी पूछ रही है जग से, क्यूं मन्दिर में जाते हो,
जब बेटी से करते नफरत तो क्यूं मां को भोग लगाते हो,
बेटी कोख़ में मारोगे तो एक दिन पछताओगे,
हर घर में बेटे होगें तो बहू कहां से लाओगे,
धरा से मिट जाते हैं वो घर जिनमें बेटी पर आघात हुआ,,
मैं बेटी हुं बेटी होना देखो कैसे श्राप हुआ,,
          #सचिन राणा “हीरो”
          हरिद्वार, उत्तराखंड

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

रावण

Wed Jun 27 , 2018
         हमारे अन्दर दो रावण छुपे हुए हैं एक वो जो रामायण को देखकर आया है दूसरा वो जो छुपा -छुपा सा रहता है यदा -कदा ही वो दर्शन देता है पहला रावण, रावण होने का दम्भ भरता है वही दूसरा अकसर राम होने का ढोन्ग करता है पहला रावण […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।