Author Archives: matruadmin - Page 1067

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बचपन की यादें….

याद बहुत आते हैं हमको बालपन के दिन, खड़िया-बोदका,पाटी-बस्ता,पेंसिल वाले दिन। गाय-भैंस का मट्ठा-मक्खन,मावा वाले दिन, खीरा-ककरी,बिही,मकाई की टोररी वाले दिन... याद बहुत आते हैं हमको बालपन के दिन।। खड़िया-बोदका,पाटी-बस्ता,पेंसिल…
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सिमटने लगे हैं घर

सिमटने लगे हैं घर,अब दादी के दौर के, बिखरने लगे हैं लोग,जब गाँव छोड़ के। हो गया बड़ा मेरा गाँव,सरहद के छोर से, बनने लगे मकां,जब घरों को तोड़ के।…
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अपने और सच्चे

अपने और सच्चे, कभी भी साथ नही छोड़ते हैं.. चाहे जैसी मुसीबत हो,साथ में होते हैं। परीक्षा जो लो, मुसीबत में मुँह नहीं मोड़ते हैं, वे तो मतलबी.. यार है…
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रोटी….

दुनिया के हर इंसान को,क्या-क्या नाच नचाती है रोटी, एक सीधे सच्चे इंसान को,कैसे-कैसे हालातों से मिलाती है रोटी। जितनी आपाधापी है दुनिया में,उसका सीधा कारण है रोटी, महिलाओं की…
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पूछा नहीं दर्द कैसा था

मो संग करी बड़ी नादानी ,न आऊँ तोरे द्वार पिया, मैं भोली सीता बन आई ,तुमने तो अविश्वास किया। पाप इंद्र का मढ़ मेरे सर ,पाषाणों-सा श्राप दिया मैं बावरी न मानी,फिर द्रौपदी का अवतार लिया, द्वापर मैं…
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रिश्ते हो गए पत्थर

नज़र की क्या कहें अब तो ज़िगर भी हो गए पत्थर। कहाँ बू-ऐ-वफा खोई कि रिश्ते हो गए पत्थर।। खुदा भी बेबसी में शब-सहर रोया यकीनन है। दरख्तों पे खिले…
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