आता है ऋतुराज जब,चले प्रीत की रीत। तरुवर पत्ते दान से, निभे धरा-तरु प्रीत। निभे धरा-तरु प्रीत,विहग चहके मनहरषे। रीत प्रीत मनुहार, घटा बन उमड़े बरसे। शर्मा बाबू लाल, सभी को मदन सुहाता। जीव जगत मदमस्त,बसंती मौसम आता। . भँवरा तो पागल हुआ, देख गुलाबी फूल। कोयल तितली बावरी, चाह […]
