बचपन,जवानी और बुढ़ापा जीवन का हर रंग खरा सा बचपन मे जिसे संस्कार मिले पढ़ने का अच्छा आधार मिले जवानी उसकी पहचान बनाती ताकत भी राष्ट्र काम आती कुसंस्कारों से वह बचा रहता सद्चरित्र उसके सदा काम आता बुढ़ापा भी उसका कष्ट न देता निरोग काया स्वस्थ्य मन देता प्रभु […]

जब भी अवसर मिले करों प्रभु को याद व्यर्थ का चिंतन खत्म हो सद्चिन्तन हो आज चिंताविहींन जीवन बने स्थिर मन और दिमाग रुग्ण कोई निकट न आए सफल हो हर काज तन के लिए व्ययाम करे मन के लिए हो ध्यान जीवन धन्य हो जायेगा मिल जायेगा जब परमात्म […]

हत्या,लूट,बलात्कार बढ़ रहे जीवन मूल्य जीवन से घट रहे जिन बच्चियो को मानते है देवी उनपर ही अत्याचार हो रहे घोर कलियुग की पड़ी है छाया पाप दिन प्रति दिन बढ़ रहे धैर्य,दया,सेवा सब भूले आस्तीन मे देखो सांप पल रहे गलत करते भी कांपती नही रुह स्वार्थ मे ऐसे […]

जीवन एक उपहार है ईश्वर का चमत्कार है हर एक पल इसका अनमोल सीमित सांसो का यह झोल व्यर्थ समय यूँ न गंवाओ जीवन को सफल बनाओ पहले आभार करो ईश्वर का फिर सत्कार करो जीवन का विकार जरा भी लगने न पाये संस्कारो मे आगे आ जाये आत्मस्वरूप मे […]

झूठ बोलकर संख्या बल का खेला जमकर उन्होंने खेल विधायको को बिकाऊ समझ लगा रहे थे उनकी सेल संविधान के रक्षक गवर्नर अपनी गरिमा भी गंवा बैठे अपने आकाओ के कहने पर कमजोर को सीएम बना बैठे सुप्रीम कोर्ट का सुप्रीम आदेश कलई उनकी खोल बैठा सत्ता का नशा काफूर […]

ईमान धर्म सब भूल गए कुर्सी रही बस याद जैसे भी हो कुर्सी मिले चाहे देश हो जाये बर्बाद संविधान ने दिया है जिनको महामहिम का ओहदा वे ही पक्षपाती हो गए कर रहे सत्ता का सौदा गोवा,मेघालय,मणिपुर मे चला गठबंधन का जादू कर्नाटक मे गठबंधन गलत बोल रहे गवर्नर […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।