किसी से प्यार मिले-न मिले, नफरत नहीं चाहिए.. जिन्दगी के इस सफर में प्यार मिलना चाहिए। जीवन साथी जो मिले, विश्वाश होना चाहिए.. गाड़ी के दो चक्के हैं, साथ चलना चाहिए। जिन्दगी में सब मिले, नफरत न होना चाहिए.. सुख में भी और दुःख में भी एकसाथ चलना चाहिए। कदम-से-कदम […]

आज व्यंग्यकार बनने के लिए मन अधीर हुआ,तो हो गया शुरु..,सोचा होली का माहौल है तो होली पर ही लिखा जाए। सोचना शुरू किया तो पहला प्रश्न आँखों के आगे आया कि, होली का मतलब है क्या?बचपन में नानी की जुबानी याद आई  कहानी कि,’हिरण्यकश्यप की बहिन हती होलिका बाके […]

औरत होने के लिए… कितने पशेमान कपड़े पहने हैं उस आसमानी लड़की ने। जो फुदक रही है आसमान की छाती पे, झूम रही है मेहताब के सूफ़ी गीतों से.. खेल रही है आकाशगंगा के अनगिनत खिलौनों से। एक दिन जिसे जमीं की कूचा आके, बनना है कल की संघर्षशील औरत.. […]

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मन भटकता है,तो भटकने दो, उन्मुक्त गगन में,पंछी-सा विचरने दो। न लगाओ पहरे,इस सिरफिरे दीवाने पर, जो चाहे,जैसा चाहे उसे करने दो। मस्त मौला है ये,कब किसी की सुनता है, हर वक्त हर लम्हा मौज में ही जीता है। फूलों-फूलों,डाली-डाली इसे भँवरे-सा भ्रमरने दो, जो चाहे,जैसा चाहे उसे करने दो। […]

दिन के हलक में, अटक जाता है अक्सर शाम का कोर.. जो खाता है वो, उदासी की साग से। लाल सूरज की पुरी, फिर थपथपाती है उसकी, काल माँ पीठ.. पिला देती है, कुछ अश्कों का पानी और खिला देती है इक ख्वाब के चाँद का सफेद-सा बताशा। यूँ कोर […]

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तिनका तिनका बिखर गई हैं, मेरी सांसें किधर गई हैं। पीछे-पीछे भागा दौड़ा, आगे-आगे जिधर गई हैं। दुनिया के मेले में ढूँढा, उधर गई या इधर गई हैं। खतरा कतरा-कतरा आया, मुस्कानें भी बिफर गई हैं। मानवता मकड़ी जाले में, सच को दीमक कुतर गई है। नोटों का बंडल जो […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।