मजदूर हैं मजबूर

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nitendra sinh
लिखूँ परिश्रम उस प्राणी का,करें सदा शुभ काम हैं।
पहने नही वदन पर कपङे,मजबूरी का नाम हैं।।

एक गरीब का लङका देखो,धूप में निशदिन जलता हैं।
कांटो वाली पगडंडी से,सत्य मार्ग पर चलता है।।
मीठे बोल सभी सें बोले,बोले सुबहो शाम हैं।।
पहने नही वदन पर कपङे,मजबूरी का नाम हैं।।1।।

किस्मत का कुछ दोष नही हैं,आज हमें क्या दिखलाती।
पेट नही हैं अन्न का दाना,हमको चलना सिखलाती।।
महंगाई ने मारा सबको,पाकेट में न दाम हैं।।
पहने नही वदन पर कपङे,मजबूरी का नाम हैं।।2।।

काम काज जो कर लेता हूँ,पेट उसी से पलता हैं।
हूं मजदूर बहुत मजबूरी, आज यही पन खलता हैं।।
बैठ सका न चैन से एक दिन,चलता आठोयाम हैं।।
पहने नही वदन पर कपङे,मजबूरी का नाम हैं।।3।।

मिट्टी से पैदा जिन्दगानी,मिट्टी में ही मिलना हैं।
हो जाऊं मशहूर यहा पर,फूल गुलाब सा खिलना हैं।।
*भारत* लेख लिखेगा प्यारा,सच्चाई का जाम हैं।।
पहने नही वदन पर कपङे,मजबूरी का नाम हैं।।4।।

#नीतेन्द्र सिंह परमार ‘भारत’
परिचय : नीतेन्द्र सिंह परमार का उपनाम-भारत है। डी.सी.ए. के बाद वर्तमान में बी.एस-सी.(नर्सिंग) के तृतीय वर्ष की प़ढ़ाई जारी है। आपका जन्म १५ जुलाई १९९५ को बरेठी(जिला छतरपुर, मध्यप्रदेश) में हुआ है। वर्तमान निवास कमला कॉलोनी (छतरपुर)में है। रचनात्मक कार्य में आपके खाते में मुक्तक,गीत,छंद और कविताएं (वीर रस) आदि हैं। शास्त्रीय संगीत एवं गायन में रुचि रखने वाले श्री सिंह मंच संचालन में प्रतिभावान हैं। यह छतरपुर में ही नर्सिंग छात्र संगठन से जुड़े हुए हैं। लेखन और काव्य पाठ के शौकीन नीतेन्द्र सिंह की नजर में समाजसेवा सबसे बड़ा धर्म है, और सबके लिए संदेश भी यही है।

Arpan Jain

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