हस्तेक्षप

devendr soni

सुबह के आठ बजने को थे। रमा अपने दोनों बच्चों का टिफिन बनाकर उन्हें स्कूल बस में बैठाकर लौटी ही थी कि तभी फ़ोन घनघना उठा। बुरा सा मुँह बनाकर उसने फोन उठाया । वह समझ गई थी कि मायके से उसकी मां का फोन ही होगा।
मौके – बे मौके मां का फोन आना और उसकी निजी जिंदगी में बेमतलब हस्तक्षेप करना अब रमा को भारी पड़ने लगा था। उसे उसकी गृहस्थी बिखरती नजर आ रही थी । यदि वह अपनी मां की बात नही मानती थी तो मां नाराज हो जाती और फिर उसके पति रमेश को उल्टा – सीधा सुनाती । इसका सीधा असर उसी पर पड़ता। रमेश अपना सारा गुस्सा रमा पर निकालता। रमा की सासु मां भी उसे जली कटी सुनाती और कहती – पता नही कैसी बहू मिली है।शादी के पांच साल हो गए लेकिन अभी भी अपनी मां के पल्लू से ही चिपकी रहती है। उन्हीं की बात मानती है।
आज तो हद ही हो गई – जब मां ने सुबह सुबह ही फोन करके उसे अलग रहने की सलाह दे डाली।रमा के मना करने पर बिफर गई वे और बोली – कुछ अपने भविष्य के बारे में भी सोच रमा ! कब तक संयुक्त परिवार में पिसती रहेगी। कब तक सास ससुर और देवर की सेवा करेगी । कल जब तेरे पास कुछ नही होगा तो अपने बच्चों की परवरिश कैसे करेगी। बहुत रह ली अपने संयुक्त परिवार में । अब अलग रहकर अपना घर बसा। तुझसे यदि यह सब नही होता तो मैं ही आज रमेश से अलग रहने का बोल देती हूँ ।
ऐसा कहकर रमा की माँ ने फोन काट दिया।
रमा परेशान हो उठी मां की बातें सुनकर। उसे उनका यह हस्तक्षेप नागवार गुजरा और उसने तुरंत ही रमेश को ऑफिस फोन लगाकर सारी बातें बता दी । साथ ही यह भी कह दिया – मां को फोन आये आपके पास तो इस बार उनका बिलकुल भी लिहाज़ नही करना और उन्हें अपने परिवार में अनावश्यक हस्तक्षेप न करने के लिए कह देना। भले ही मां मुझसे रूठ जाए । मुझे किसी भी हालत में अलग नही रहना है। और हां ..भले ही मुझसे मेरी माँ रूठ जाए ..पर मैं अपनी इस मां को नहीं रूठने दूंगी जिनके साथ मैं रहती हूँ और जो मुझे अपनी मां से भी ज्यादा प्यार करती है । आज मैने निर्णय कर लिया है – यहीं मेरी माँ हैं ।
यह कहकर रमा ने फोन रख दिया। उधर रमेश ऑफिस में चाय की चुस्कियाँ लेते हुए अपनी पत्नि के समझदारी भरे निर्णय पर गर्व महसूस करते हुए मंद मंद मुस्कुरा रहा था।
उसने भी निर्णय कर लिया था – आज यदि मांजी का फोन आया तो अब वह उनका लिहाज नही करेगा और आए दिन का अनावश्यक हस्तक्षेप हमेशा हमेशा के लिए खत्म कर देगा , भले ही अंजाम जो भी हो । अब तो रमा भी मेरे साथ है।

              #देवेन्द्र सोनी

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।