हर जहां में है मेरा फैला है तराना।
लाई साथ खुशियों का नजराना॥
ख्वाबों की दुनिया का सफर है सुहाना।
कैसे तय करुं,न साथ हमसफर न जमाना॥
सपनों को,पूरे करने की है चाहत।
न उम्मीद है,किसी से न शिकायत॥
आस है जीवन,न है कोई हकीकत।
जिंदगी है अधूरी,बस यही है मुसीबत॥
जिंदगी है एक दुःख का दरिया।
किस्मत और मेरे दरम्यान है दूरियां॥
ईश्वर ने हर जख्म है ले लिया।
इबादत ही है एकमात्र जरिया॥
#तृप्ति तोमर
परिचय : भोपाल निवासी तृप्ति तोमर पेशेवर लेखिका नहीं है,पर छात्रा के रुप में जीवन के रिश्तों कॊ अच्छा समझती हैं।यही भावना इनकी रचनाओं में समझी जा सकती है। मध्य प्रदेश के भोपाल से ताल्लुक रखने वाली तृप्ति की लेखन उम्र तो छोटी ही है,पर लिखने के शौक ने बस इन्हें जमा दिया है।