मुझे प्यार है..

anantram

मुझे प्यार है,
खेत से खलिहान से,
मेहनती किसान से
जो खेतों से उगाकर,
देता है अनाज को।

मुझे प्यार है,
धरती से, धरती..
की शान से
जो हर मौसम में सजी
रहती है परिधान से।

मुझे प्यार है,
गरीब मजदूर से ,
जो ठंड गर्मी बरसात में..
पसीना बहाता है शरीर से।

मुझे प्यार है नदियों से,
जो सभी को पीने को..
पानी देती है सदियों से।

मुझे प्यार है,
वनों से , पेड़ों से..
इमारती जलाऊ
लकड़ी मिलती है,
जंगली जानवरों के
रहने की जगह होती है।

मुझे प्यार है ,
पहाड़ पर्वत जंगलों से..
जो जलवायु परिवर्तन
करते हैं हवाओं से।

मुझे प्यार है,
गाय भैंस बकरी से,
निस्वार्थ देती है
सभी को पीने को।

मुझे प्यार है,
माता-पिता भाई
बहिन परिवार से।

मुझे प्यार है,
अपने गाँव से,जहाँ..
पैदा हुआ खेला कूदा,
लिखा योग्य हुआ।

मुझे प्यार है
जबलपुर शहर से
यहां जीवन यापन करने
रेलवे में नौकरी मिली..
शादी हुई, रिटायर हुआ।

मुझे प्यार है,
पत्नी से, जीवन संगिनी से,
सुख-दुख की जीवनसाथी है,
तन-मन-धन की साथी है।
बहुत बहुत अच्छी है।

मुझे प्यार है,
अपने देश से..
देश की शान से,
शहीदों के बलिदान से।

सब मिलकर मनाते हैं,
15अगस्त, 26जनवरी..
बहुत ही शान से।

होली दिवाली दशहरा,
रामनवमी कृष्ण जन्माष्टमी..
मनाते हैं धूमधाम से।

मुझे प्यार है,
हिन्दू मुस्लिम सिख..
ईसाई के भाईचारे से,
मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारा से।

मुझे प्यार है,
भगवान से ज्ञान बुध्दि..
सबकुछ दिया है,
जिन्दगी में सुख-दुख,
भी सब साथ दिया,
खुश हूँ भगवान से।

उनके चरणों में नमन,
प्रार्थना करता हूँ..
भगवान से ।

    #अनन्तराम चौबे

परिचय : अनन्तराम चौबे मध्यप्रदेश के जबलपुर में रहते हैं। इस कविता को इन्होंने अपनी माँ के दुनिया से जाने के दो दिन पहले लिखा था।लेखन के क्षेत्र में आपका नाम सक्रिय और पहचान का मोहताज नहीं है। इनकी रचनाएँ समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती हैं।साथ ही मंचों से भी  कविताएँ पढ़ते हैं।श्री चौबे का साहित्य सफरनामा देखें तो,1952 में जन्मे हैं।बड़ी देवरी कला(सागर, म. प्र.) से रेलवे सुरक्षा बल (जबलपुर) और यहाँ से फरवरी 2012 मे आपने लेखन क्षेत्र में प्रवेश किया है।लेखन में अब तक हास्य व्यंग्य, कविता, कहानी, उपन्यास के साथ ही बुन्देली कविता-गीत भी लिखे हैं। दैनिक अखबारों-पत्रिकाओं में भी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। काव्य संग्रह ‘मौसम के रंग’ प्रकाशित हो चुका है तो,दो काव्य संग्रह शीघ्र ही प्रकाशित होंगे। जबलपुर विश्वविद्यालय ने भीआपको सम्मानित किया है।

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।