पर्यायवाची शब्द चालीसा

dashrath
कृष्ण कन्हैया श्याम है,मोहन ब्रजगोपाल।
दीनबंधु राधारमण,दुखहारक नंदलाल॥
समान अर्थ के शब्द में,भाषा का है ज्ञान।
शब्दों की कर साधना,कहते कवि मसान॥
सरस्वती भारती माँ शारद।
ब्रह्मासुत ज्ञानीमुनि नारद॥
पवनतनय कपिपति हनुमाना।
राघव रघुवर राजा रामा॥
वानर बंदर मरकट कीशा।
भगवन ईश्वर प्रभु जगदीशा॥
अम्मा जननी अम्बा माता।
पाँव चरण पग पद अरु पादा॥
सोम सुधाकर शशि राकेशा।
राजा भूपति भूप नरेशा॥
पानी अम्बु वारि पय नीरा।
हवा पवन अरु वायु समीरा॥
दिवा दिवस दिन वासर वारा।
पर्वत अचला शैल पहाड़ा॥
विश्व जगत जग भव संसारा।
घर गृह आलय अरु आगारा॥
अग्नि पावक आगा दोहन।
चक्षु आँखा नयना लोचन॥
विषधर सर्पा नाग भुजंगा।
घोड़ा घोटक बाजि तुरंगा॥
हिरन मिरग सुरभी सारंगा।
गज हाथी करि नाग मतंगा॥
वस्त्र वसन अम्बर पट चीरा।
तोता शुक अरु मिट्ठू कीरा॥
दुग्धा दूध पय अरु क्षीरा।
गात कलेवर देह शरीरा॥
शेर केशरी सिंह वनराजा।
 सुरपति  इन्द्रा देवसमाजा॥
अमी सुधा अमरत मधु सोमा।
 नभ अम्बर आकाशा व्योमा॥
दानव राक्षस दैत्य निशाचर।
नीरज पंकज अरविंद इन्दीवर॥
असि तलवार खडग किरपाला।
आम्र आमा अमिय रसाला॥
पुत्र तनय सुत बेटा पूता।
कोयल कोकिल पिक पर भूता॥
बेटी पुत्री सुता आत्मजा।
यमुना कालिन्दी भानुजा॥
रक्त लहू शोणित अरु खूना।
पुष्प सुमन गुल फूल प्रसूना॥
विष्णु चतुर्भुज हरि चक्राधर।
वारिद बादल नीरद जलधर॥
बिजली चपला तड़िता दामिनि।
रात निशा रजनी अरु यामिनि॥
भौंरा मधुकर षट्पद भृंगा।
खगपक्षी द्विज विहग विहंगा॥
मित्र सखा सहचर सह मीता।
घी घृत अमृत अरु नवनीता॥
रक्तनयन  हारित कबूतर।
चोर खनक मोषक रजनीचर॥
अम्बुधि नीरधि पयोधि सागर।
सूरज भानु सूर्य दिवाकर॥
सर तालाब सरोवर पुष्कर।
आशुतोष शिव शम्भू शंकर॥
सिया रमा अरु जनकदुलारी।
औरत नारी अरु घरवारी॥
पानी के पर्याय में,दधिजा का रख ध्यान।
बादल सागर अरु कमल,कहते कवि मसान॥
 #डाॅ. दशरथ मसानिया

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पावन गंगा

Sat Dec 2 , 2017
गंगा मैया तुम्हें प्रणाम,ले ले जाएं हम तो नाम, जय जय गंगा मैया,जय जय राम,राम, राम। पतित पावनी गंगा देखो,कितनी है ये  पावन, उतर गए जो पानी में,लगे नीर मनभावन। न हो मन निकलने का तो,स्नान करे दिन -शाम, गंगा मैया तुम्हें प्रणाम,ले ले जाएं हम तो नाम। जय जय […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।