कृष्ण कन्हैया श्याम है,मोहन ब्रजगोपाल।
दीनबंधु राधारमण,दुखहारक नंदलाल॥
समान अर्थ के शब्द में,भाषा का है ज्ञान।
शब्दों की कर साधना,कहते कवि मसान॥
सरस्वती भारती माँ शारद।
ब्रह्मासुत ज्ञानीमुनि नारद॥
पवनतनय कपिपति हनुमाना।
राघव रघुवर राजा रामा॥
वानर बंदर मरकट कीशा।
भगवन ईश्वर प्रभु जगदीशा॥
अम्मा जननी अम्बा माता।
पाँव चरण पग पद अरु पादा॥
सोम सुधाकर शशि राकेशा।
राजा भूपति भूप नरेशा॥
पानी अम्बु वारि पय नीरा।
हवा पवन अरु वायु समीरा॥
दिवा दिवस दिन वासर वारा।
पर्वत अचला शैल पहाड़ा॥
विश्व जगत जग भव संसारा।
घर गृह आलय अरु आगारा॥
अग्नि पावक आगा दोहन।
चक्षु आँखा नयना लोचन॥
विषधर सर्पा नाग भुजंगा।
घोड़ा घोटक बाजि तुरंगा॥
हिरन मिरग सुरभी सारंगा।
गज हाथी करि नाग मतंगा॥
वस्त्र वसन अम्बर पट चीरा।
तोता शुक अरु मिट्ठू कीरा॥
दुग्धा दूध पय अरु क्षीरा।
गात कलेवर देह शरीरा॥
शेर केशरी सिंह वनराजा।
सुरपति इन्द्रा देवसमाजा॥
अमी सुधा अमरत मधु सोमा।
नभ अम्बर आकाशा व्योमा॥
दानव राक्षस दैत्य निशाचर।
नीरज पंकज अरविंद इन्दीवर॥
असि तलवार खडग किरपाला।
आम्र आमा अमिय रसाला॥
पुत्र तनय सुत बेटा पूता।
कोयल कोकिल पिक पर भूता॥
बेटी पुत्री सुता आत्मजा।
यमुना कालिन्दी भानुजा॥
रक्त लहू शोणित अरु खूना।
पुष्प सुमन गुल फूल प्रसूना॥
विष्णु चतुर्भुज हरि चक्राधर।
वारिद बादल नीरद जलधर॥
बिजली चपला तड़िता दामिनि।
रात निशा रजनी अरु यामिनि॥
भौंरा मधुकर षट्पद भृंगा।
खगपक्षी द्विज विहग विहंगा॥
मित्र सखा सहचर सह मीता।
घी घृत अमृत अरु नवनीता॥
रक्तनयन हारित कबूतर।
चोर खनक मोषक रजनीचर॥
अम्बुधि नीरधि पयोधि सागर।
सूरज भानु सूर्य दिवाकर॥
सर तालाब सरोवर पुष्कर।
आशुतोष शिव शम्भू शंकर॥
सिया रमा अरु जनकदुलारी।
औरत नारी अरु घरवारी॥
पानी के पर्याय में,दधिजा का रख ध्यान।
बादल सागर अरु कमल,कहते कवि मसान॥
#डाॅ. दशरथ मसानिया