अमृत महोत्सव के अंतर्गत अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ‘देसराग’ सम्पन्न

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कविता में युवाओं के कारण सशक्तता -डॉ. दवे

तिरंगा डोल रे- नीलोत्पल मृणाल

सिर्फ़ शम्भू ही स्वयंभू है- गौरव साक्षी

प्राचीन साहित्य को नई पीढ़ी तक लाना ज़रूरी है-एसीपी डॉ. चौबे

कवि श्री दिग्गज स्वर्णाक्षर सम्मान से सम्मानित

इंदौर। राष्ट्र प्रेम से सराबोर होकर स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर इन्दौर प्रेस क्लब में मातृभाषा उन्नयन संस्थान व इन्दौर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ‘देसराग’ आयोजित हुआ, जिसमें बतौर अतिथि अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डॉ. प्रशांत चौबे, साहित्य अकादमी, म.प्र. शासन के निदेशक डॉ. विकास दवे व इन्दौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविंद तिवारी उपस्थित रहे। अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ काव्य अनुष्ठान का आरंभ हुआ। अतिथियों का स्वागत शिखा जैन, जलज व्यास, आशीष पंवार, शिवा इन्दौरी, आशीष तिवारी, अतुल तिवारी, सक्षम राहुल, गौरव गुप्ता, वाणी अमित जोशी ने किया। शब्द स्वागत मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन अविचल ने किया।
इसके बाद उज्जैन के कवि दिनेश दिग्गज को ‘स्वर्णाक्षर सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मान पत्र का वाचन प्रीति दुबे ने किया।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डॉ. प्रशांत चौबे ने कहा कि ‘शहर में रचनाओं और कविता का अलग माहौल है, इसकी गूँज देश भर में हो रही है। साहित्य में राष्ट्र प्रेम के साथ नई पीढ़ी को जोड़ना होगा।’

साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने कहा कि ‘कविता के क्षेत्र में युवाओं की भूमिका से सबलता और सशक्तता आ रही है।’
कवि सम्मेलन का आरंभ शारदे वंदना से हुआ, जिसे कवयित्री सोनल जैन ने किया। काव्य उत्सव में सिवनी से अवनीश पाठक ने राष्ट्र आराधना की कविताएँ पढ़ीं।
इनके बाद इन्दौर के लाडले और संयोजक कवि गौरव साक्षी ने मुक्तकों और कविता से युवाओं को जोड़ा। कवि गौरव साक्षी ने हिन्द के सेना के बारे में छंद पढ़े, साथ ही सुनाया कि ‘सिर्फ़ शम्भू ही स्वयम्भू है जगत में, हर किसी का कोई न कोई जनक है।
काव्य पाठ के अगले क्रम में सूरत से आई सोनल जैन ने शृंगार रस की कविताएँ सुनाईं।


इसके बाद दिल्ली के कवि अमित शर्मा ने महाभारत का दृश्य अपनी कविता में बनाया। उन्होंने सुनाया कि ‘एक विधान, एक परिधान और एक संविधान होगा, लाल चौक की छाया में राष्ट्रगान होगा।’


हास्य की महफ़िल सजाते हुए देवास के कवि कुलदीप रंगीला ने माहौल में हँसी के फ़व्वारे उपस्थित कर दिए।
युवाओं के चर्चित कवि नीलोत्पल मृणाल में माहौल बदलते हुए फिर तिरंगा डोल रे गीत सुनाया और यह भी सुनाया कि ‘जगत माटी का ढेला रे।’


अंत में शिखर कलश उज्जैन के वरिष्ठ हास्य कवि दिनेश दिग्गज जी ने रखते हुए हास्य की रचनाएँ सुनाई।
देसराग का प्रारंभिक संचालन अंशुल व्यास ने व कवि सम्मेलन का संचालन कवि कुलदीप रंगीला ने किया।
कवि सम्मेलन के उपरांत सभी हिन्दीयोद्धाओं का सम्मान किया गया। आभार वरिष्ठ पत्रकार मुकेश तिवारी ने माना।
देसराग में इन्दौर टॉक, ओजल फ़ार्मा और दिलजीटल को भाषा सारथी सम्मान दिया गया। आयोजन में डॉ. नीना जोशी, शिखा जैन, भावना शर्मा, नितेश गुप्ता, अमरवीर कौर चड्ढ़ा, सचिव इंदु पाराशर, नीलम तोलानी, अरविंद ओझा, देवेंद्रसिंह सिसौदिया, प्रोफ़ेसर अखिलेश राव, लेखक एकाग्र शर्मा, हिमांशु भावसार, प्रबल जैन, अतुल तिवारी, आशीष तिवारी, आशीष पँवार आदि मौजूद थे।

एक नवोदित कवि हर बार
प्रकल्प संयोजक गौरव साक्षी ने बताया कि ‘मातृभाषा उन्नयन संस्थान का प्रयास रहता है कि अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में शहर या प्रदेश के एक नवोदित कवि को हर बार बुलाया जाएगा और मानदेय देकर ही काव्य पाठ करवाया जाएगा।’ इस प्रयास को जनमानस से ख़ूब सराहना मिली।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।