ढूँढती हूँ एक भारत

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ढूँढती हूँ अनेकता में एकता
विविधतायों से भरे हुए से देश में
रंग गुलाल में मिलकर
जो प्यार के रंग में बदल जाता था।
ढूँढती हूँ अमन -चैन
इस फिरका परस्ती के दौर में
जहां भाई -भाई का रक्त पिपासु बन बैठा है।
ढूँढती हूँ उस अजेय से भारत के
प्यार और अपनत्व को
जहां से अहिंसा और सत्य का
वैश्विक उद्घोष होकर
धरती के हर दिशा में गूंजता था ।
ढूँढती हूँ राम और रहीम के
चौपाई और दोहों में
विश्व बंधुत्व के परम सत्य को
जियो और जीने दो की
शाश्वतता की भावना को
इस आपसी रंजिशें के दौर में ।
ढूँढती हूँ राम और कृष्ण को
जहां सीता और द्रोपती के सम्मान की खातिर
सत्तापिपासुयों के अहंकार से
दम्भित शीशों को
रणभूमि की माटी में मिला दिया जाता था।
ढूँढती हूं उन श्रेष्ठ प्रतिमानों में
इस झूठ की सत्ता परस्ती में में
अपने प्यारे भारत वर्ष को
जो सुशासन, सुव्यवस्था , सुसंस्कार में,
विश्व पटल पर गुरु बनकर
इतिहास के आईनों में
सूर्य की भांति दैदिप्तमान रहता था।
स्मिता जैन

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।