HomoeoTalk के द्वारा युवा डॉक्टरों की टीम दे रही निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं।

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वैश्विक महामारी कोरोना से हर कोई लड़ रहा है। वर्तमान में देश भर में इस महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। कोरोना संकट के बीच हुए लॉक डाउन के दौरान आमजन की मदद के लिए कई लोग सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में खरगोन की गुरव समाज के एक युवा डॉक्टर आकाश काले एवम उनकी टीम द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से जन सेवा का कार्य किया जा रहा है।  जिसे होम्यो टॉक नाम दिया गया है।  उनके द्वारा अभी तक दस निःशुल्क केम्प का आयोजन कर आयुष चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने तथा स्वास्थ के प्रति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा चूका है।इस मुहिम में उनके वरिष्ठ डॉ.मनीष सिंह गुर्जर, के निर्देशन में डॉ.अविनाश पुष्पकर, डॉ.पवन वर्मा, डॉ.अंशुबला मंडलोई, डॉ.मानषी जाधम, डॉ. प्रणय पंडित, डॉ.पलाश बजाज, अन्य युवा डॉक्टरों की टीम द्वारा स्वास्थ्य शिविरों में सहयोग दिया जा रहा है। होम्यो टॉक द्वारा अभी तक गुरव समाज खरगोन, ग्राम दवाना जिला बड़वानी, ग्राम काकोडा, गायत्री शक्तिपीठ खरगोन, महिला मंडल नूतन नगर, झिरनिया, उबङी, गायत्री चेतना केंद्र, ग्राम धुलकोट, ग्राम डाबरिया अन्य स्थानों पर निशुल्क केम्प आयोजित कर स्वास्थ्य सेवाएं दी गयी। डॉक्टर आकाश काले ने बताया कि उनकी युवाओं की टीम जो एक युवा होम्योपैथ है ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढावा देने तथा इन आयुष चिकित्सा पद्धतियों को प्राथमिक चिकित्सा पद्धति के रूप में उपयोग करने हेतु जन जाग्रति अभियान के रूप में होम्यो टॉक की स्थापना की गई । होम्यो टॉक द्वारा निःशुल्क सेवाएं दि जा रही है जो निरन्तर चल रही है । मुख्य तौर पर स्वास्थ शिविरों का आयोजन करना जिसमें कोविड 19 से बचाव हेतु रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए होम्योपैथी दवाइयों का निःशुल्क वितरण करना , तथा स्वास्थ  शिविरों का आयोजन करना मुख्य है ।उन्होंने बताया कि वर्तमान समय बहुत ही भीषण ओर भयवाह होता चला जा रहा है, दिनोदिन बड़ते तापमान, प्रदुषण ओर बिगड़ती दिनचर्या के कारण अनेको रोग प्रतिदिन मानव जाति पर संकट के बादलों की तरह हमेशा ही घेरे रहते है । रोगों से निजात पाने के लिए अक्सर हम लोग आधुनिक चिकित्सा पद्धति (एलोपैथी) की ओर अग्रसर हो जाते है परन्तु एलोपैथी की अधिकतर दवाइयां शरीर में जा कर कई सारे साइड इफेक्ट्स भी पहुंचा देती है ओर कुछ बीमारियों में तो जीवन परियांत दवाइयां लेनी होती है ।रोग का हमारे शरीर में उत्पन्न होने का सबसे बड़ा कारण हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता का कम हो जाना होता है । वर्तमान कोरोना वैश्विक महामारी के चलते अब यह सिद्ध हो गया है कि हमे अब हमारी परम्परा गत चिकित्सा पद्धतियों की ओर फिर से अपना रुझान बड़ाना ही होगा , हमारी  प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों में भरपूर शक्ति मौजूद है । बस इसी के उद्देश्य को लेकर डॉ आकाश काले ओर डॉ मनीष सिंह गुर्जर जो की युवा होम्योपैथ है ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढावा देने तथा इन आयुष चिकित्सा पद्धतियों को प्राथमिक चिकित्सा पद्धति के रूप में उपयोग करने हेतु जन जाग्रति अभियान के रूप में HomoeoTalk की स्थापना की गई । HomoeoTalk एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसके माध्यम से आयुष चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने की विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां संचालित होती रहती है । HomoeoTalk केवल होम्योपैथी ही नहीं सम्पूर्ण आयुष चिकित्सा पद्धतियों जैसे आयुर्वेद , योग, प्राकृतिक चिकित्सा आदि को लेकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है । डॉ आकाश काले ने बताया कि HomeoTalk टीम में कई सारे शासकीय ओर अशासकीय संस्थाओं के विभिन्न विधाओं के डाक्टर जुड़े है जिनके मार्गदर्शन में ही विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों का संचालन होता है । HomoeoTalk का उद्देश्य ग्रामीण , शहरी ओर पिछड़े इलाके जहां पर लोग अपने स्वास्थ के प्रति जागरूक ही नहीं है , इस तरह के इलाकों में जा कर आयुष चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने तथा स्वास्थ के प्रति जागरूकता हेतु शिविर आयोजित की जाते है ।HomoeoTalk की रचनात्मक गतिविधियो में स्वास्थ के प्रति जागरूकता हेतु विभिन्न प्रकार के कार्य निरन्तर टीम द्वारा संचालित होते ही रहते है , देश में वैश्विक महामारी के चलते लॉकड़ाउन लगाया गया था उस भीषण समय में भी HomoeoTalk द्वारा निःशुल्क सेवाएं दि गई थी जो निरन्तर चल रही है ।मुख्य तौर पर स्वास्थ शिविरों का आयोजन करना जिसमें कोविड 19 से बचाव हेतु रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए होम्योपैथी दवाइयों का निःशुल्क वितरण करना , तथा स्वास्थ  शिविरों का आयोजन करना मुख्य है ।इसी के साथ स्वास्थ आवर्नेस के लिए हैल्थ सेमिनारों का आयोजन भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसके माध्यम से जन साधारण को सरल ओर सहज तरीके से आयुष पद्धतियों का ज्ञान पहुंचा सके ताकि सभी आयुष पद्धतियों को प्राथमिकता के साथ उपयोग करे ना की वैकल्पिक चिकित्सा के तौर पर ।आगामी योजनाएं :- डॉ आकाश काले ओर डॉ मनीष सिंह गुर्जर ने बताया कि उनका उद्देश्य है मध्यप्रदेश में 10000 स्वास्थ शिविरों का आयोजन करना एक विशिष्ठ ओर मुख्य लक्ष्य है ।इसी के साथ साथ भिन्न भिन्न जगहों पर स्वास्थ जागरूकता हेतु सेमिनारों का आयोजन करना भी बड़ा लक्ष्य है ।HomoeoTalk की उन सभी लोगों से अपील है जो आयुष पद्धतियों का उपयोग करते है तथा अपने क्षेत्र में भी निःशुल्क स्वास्थ शिविर एवम् सेमिनार का आयोजन करवाना चाहते है तो फेसबुक  पर HomoeoTalk से जुड़ कर हमसे संपर्क करके अपने क्षेत्र में रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन करवा सकते है । HomoeoTalk द्वारा कोविड 19 जैसी महामारी के दौर में अभी तक लगभग 10 से ज्यादा जगहों पर निःशुल्क स्वास्थ शिविर का आयोजन कर रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए होम्योपैथी दवाइयों का भी निःशुल्क वितरण किया जा चुका है इसमें कुछ ऐसे सुदूर पहाड़ी आदिवासी क्षेत्र भी है जहां पर स्वास्थ सेवाएं बिल्कुल अच्छी नहीं थी , इसके यूट्यूब चैनल के मध्यम से भी स्वास्वथ्य सबंधी वीडियो के द्वारा जानकारी दी जाती है। HomoeoTalk द्वारा अभी तक 25000 से ज्यादा लोगो को निःशुल्क होमियोपैथी दवाइयों का वितरण किया जा चुका है जो निरन्तर चालू है ।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।