कोरोना त्रासदी

0 0
Read Time4 Minute, 58 Second


चीन में जन्मा कोरोना मांसाहार व अभक्ष्य आहार की देन है | आज कोरोना ने पूरे विश्व पर खतरा पैदा कर दिया है |  विश्वभर के डॉक्टर, वैज्ञानिक कोरोना वायरस को लेकर चिंतित हैं | सारा विश्व कोरोना के आतंक की तबाही की जद में आ चुका है | धीरे-धीरे कोरोना एक महामारी का रूप धारण करता जा रहा है | चीन में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है और वहीं कोरोना की वजह से सबसे अधिक मौतें हुईं हैं |
 हालांकि हमारे भारत में कोरोना वायरस से ग्रसित व्यक्ति बहुत कम मिले हैं, परन्तु भारत सरकार ने युद्धस्तर पर कोरोना वायरस से बचाव व जानकारी देने के लिए कार्य करना शुरू कर दिया है | जिस समय कोरोना का आतंक शुरू हुआ था, उस समय हमारे भारत में बसन्त ऋतु का मौसम था या यों कहें कि अभी चल रहा है | इस मौसम में अधिकतर सामान्य खाँसी, जुकाम होना आम बात है | और कोरोना वायरस के प्रारम्भिक लक्षण भी खाँसी, जुकाम, बुखार, गले में दर्द आदि हैं | लेकिन हमें भयभीत होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सामान्य खांसी, जुकाम कोरोना नहीं होता | कोरोना वायरस की चपेट में हम तभी आ सकते हैं जब सीधे कोरोना वायरस से ग्रसित व्यक्ति, वस्तु के सम्पर्क में बगैर सुरक्षा उपकरणों के आते हैं | हमें भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से परहेज़ करना चाहिए | नंगे हाथों से किसी व्यक्ति, वस्तु को नहीं छूना चाहिए | मुँह पर मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए | बाहर की खाने पीने वाली अधिकांश पेय खाद्य सामग्री का प्रयोग बंद कर देना चाहिए | मांसाहार का त्याग कर देना चाहिए और संभव हो तो मांसाहार हमेशा के लिए त्याग कर देना ही बेहतर है | भारतीय परम्पराओं, संस्कारों को विशेषतौर पर अमल में लाने पर भी कोरोना से बचाव हो सकता है, जैसे दूर से ही नमस्ते करना…
कुलमिलाकर आज कोरोना जैसी त्रासदी से उबरने के लिए पूरे विश्व को एक साथ मिलकर कोरोना से लड़ना जरूरी हो गया है |
हम भारतीयों को इस समय कोरोना वायरस से बचाव के लिए विशेषतौर पर जागरूक होने की जरूरत है, क्योंकि इस समय भारत में नवरात्रों की शुरूआत होने वाली है | देशभर में लाखों मेले, धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होने वाले हैं, जिनमें लाखों-करोड़ों व्यक्ति एक साथ इकट्टा होते हैं | तब इस महामारी के फैलने का खतरा बढ़ जाता है | इस गंभीर समस्या को लेकर भारत सरकार ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है, फिर भी लोग अनजान बने कोरोना वायरस को लेकर मजाक बना रहे हैं | मित्रों हमें इस महामारी को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है और अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने की भी तथा अफवाहों से बचें | 

#मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

परिचय : मुकेश कुमार ऋषि वर्मा का जन्म-५ अगस्त १९९३ को हुआ हैl आपकी शिक्षा-एम.ए. हैl आपका निवास उत्तर प्रदेश के गाँव रिहावली (डाक तारौली गुर्जर-फतेहाबाद)में हैl प्रकाशन में `आजादी को खोना ना` और `संघर्ष पथ`(काव्य संग्रह) हैंl लेखन,अभिनय, पत्रकारिता तथा चित्रकारी में आपकी बहुत रूचि हैl आप सदस्य और पदाधिकारी के रूप में मीडिया सहित कई महासंघ और दल तथा साहित्य की स्थानीय अकादमी से भी जुड़े हुए हैं तो मुंबई में फिल्मस एण्ड टेलीविजन संस्थान में साझेदार भी हैंl ऐसे ही ऋषि वैदिक साहित्य पुस्तकालय का संचालन भी करते हैंl आपकी आजीविका का साधन कृषि और अन्य हैl

matruadmin

Next Post

परमात्म याद

Sat Mar 21 , 2020
महामारी के इस संकट में धैर्य किसी को खोना नही बचकर रहे इस संक्रमण से लापरवाह बस होना नही बच्चे, बुजुर्ग घर पर ही रहे बेवजह घर से जाना नही भीड़ जहां हो वहां न जाएं अब लोगो से हाथ न मिलाये स्वनियंत्रण में हित है सबका कोरोना को पास […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।