
आँखों में इंतज़ार छुपाए बैठे हैं,
दीदार की ख्वाहिश छुपाए बैठे हैं..।
यादों के लम्हें संजोकर,
इश्क-ए-इज़हार छुपाए बैठे हैं..।
जिक्र में फिक्र शामिल,
दिल-ए-बेकरार छुपाए बैठे हैं..।
खामोशी के लबों से अपने,
वफा-ए-इकरार छुपाए बैठे हैं..।
इश्क की राहों से गुज़र,
बेवजह तकरार छुपाए बैठे हैं..।
नसीबों का खेल साहिब,
दिल में इनकार छुपाए बैठे हैं..।
मिले हो तुम रुह से,
नंदिता का एतबार छुपाए बैठे हैं..।
#नंदिता

