शरद का चाँद

rashmi malviy
जब एक बच्चा रंग और कागज पहली बार पकड़ता है और कोई चित्र
 उकेरता है तब पहले पहल वो एक झोपड़ी ,नदी ,पहाड़ ,पेड़ ,चिड़िया बनाता है ।इसका मतलब है यह उसके और हमारे जन्म के साथी हैं।
कितना सुंदर और प्यारा लगता है उसका बनाना।
इन सभी से हम अपने अवचेतन से जुड़े होते हैं कोई भी अछूता नहीं रह जाता वो भी जो खुद को मरा हुआ मान चुका हो या जो इन सब बातों को बचकानी कहता हो।
इन्ही में से एक बहुत सुंदर और वाँछनीय वस्तु है चाँद..
चाँद और उसकी कहानियां…कितनी तो सुनी ,ना जाने कितनी बुनी, कितनी उधेड उधेड कर फिर से बुनी ।
कितनी मनमोहक ,सजीली कहानियां होती थी चाँद की ।हज़ारों ,लाखों लोगों खासकर स्त्रियों की आँखों का तारा चाँद।
उनकी रोटी जैसा चाँद…
उनके प्यार जैसा चाँद…
उनके उंगली के छल्लों जैसा चाँद
उनके दुपट्टे की सफेद झिलमिल जैसा चाँद
उनके सपनों का चाँद
उनकी तमन्नाओ का चाँद
उनकी ख्वाहिशें पूरी करने वाला चाँद..
उनके करवाचौथ पर उनका निर्जला साथी चाँद..
बारात में आता सजीले दूल्हे जैसा चाँद
ना जाने कितना प्रिय ,और कितने कितनों का प्रिय चाँद
चाँद और उससे बंधे रिश्ते भी कम नहीं ।हमारी नज़र बदली और चाँद का रूप बदल जाता है ।एक समय वो प्रिय है तो दूसरे घर मे किसी बच्चे का दूध मलाई खिलाने वाला मामा।
किसी का चाँद सा बेटा है तो किसी का भाई।
मुक्तिबोध की कविता का जो चाँद है उसका तो मुँह टेढ़ा है….यह भी मानने की नहीं समझने की बात है ।
बुढ़िया सूत कातती है  ये भी सुना है कितनी मीठी बात है ना बचपन की। बचपन जैसी ।
बचपन तो गुजर जाता है पर चाँद टिका रहता है।कितना टिकाऊ है ना इतना टिकाऊ तो इंसान भी नहीं उसका भरोसा भी नहीं।
आज शरद की पूर्णिमा है कहते हैं अमृत बरसता है चाँद से ,काली रात की कालिमा दूर करता है यही अमृत है।
दूर है पर सबसे नजदीक ,यही अमृत है।
कोई वादा नहीं करता पर साथ निभाता है यही अमृत है।
गलतियों पर गले लगाता है डाँटता नहीं यही अमृत है।
विष जैसे जीवन का घूंट पीने की ताकत देता है यही अमृत है।
चाँद रोज नही दिखता लेकिन होता तो है उसका यही होना ही तसल्ली है।
जब दो लोग साथ रहते हैं तब एक दिन ऐसा आता है कि वो एक दूसरे के बारे में सब जान जाते हैं फिर वो साथ रहते हुए भी साथ रहना बन्द कर देते हैं ये अकेलेपन की ओर बढ़ता पहला कदम है।
यही कारण हो शायद की पंद्रह दिन रहता फिर अगले पंद्रह दिनों के लिये गायब ।हो सकता है वो पूरा जाना , जाना नही चाहता हो।किसी के साथ रहने का मज़ा तभी है जब जानने के लिये थोड़ा थोड़ा बचा रह जाये।पूरा जाना जाए तो बिछड़ने का समय आ जाता है। जब हम चाँद को खामोशी से जाने देते है तब औरों को क्यों नहीं सभी जानते है इसका उत्तर की चाँद वापस आता है जाकर ।
वापसी मौसम ,चाँद ,बारिश के अलावा और किसी की संभव नही है क्या?
बस ऐसा ही कुछ चाँद के साथ भी तो है उसके साथ बचपन से लेकर आखरी सफर तक ना जाने कितने पड़ाव पार कर हम जिंदगी का सफर पूरा करते हैं ।
वो जिंदगी जो हम जी नहीं पाते …
फिर भी कोई एक पल तो ऐसा सौभाग्य से मिल ही जाता है जब हम कह सकते हैं की मेरे आँचल में उस रात चाँद था।
अब चाँद तो रात का ही है।
#रश्मि मालवीय
परिचय: रश्मि मालवीय
 इंदौर(मध्यप्रदेश)
समाज शास्त्र में परास्नातक
लाइब्रेरी साइंस में स्नातक
शिक्षा में स्नातक
पिछले 13 वर्षों से पुस्कालयध्यक्ष के पद पर कार्यरत व हिंदी  साहित्य से लगाव है |
कई पत्रिकाओं एवं  वेब पत्रिकाओं में कविता प्रकाशित होती है|

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।