अनुशासन 

saheblal saral
अनुशासन के साथ में जीवन, जीना बहुत जरूरी है।
समय साधकर चले निरन्तर, होगी आशा पूरी है।।
कदम कदम से ताल मिला लो, राह बना लो अपनी तुम।
धीरे चलना थक मत जाना, वरना हस्ती होगी गुम।।
लगे रहो का भाव तुम्हारा, निश्चित फलकारी होगा।
डटे रहोगे हटो नहीं तो, पल पल गुणकारी होगा।।
कदम में दम है नापेगा वो, चाहे लम्बी दूरी है।
अनुशासन के साथ में जीवन, जीना बहुत जरूरी है।।
हार रहे हो बार बार तो, बार बार कोशिश करना।
हार के आगे जीत मिलेगी, मित्र सूत्र ये तुम रटना।।
जंग जीतना ही जीवन में, जन्म सिद्ध अधिकार हो।
डरा डरा कर हार को बोलो, हार तुझे धिक्कार हो।।
हार नहीं स्वीकार करो जग, बोले जो मगरूरी है।
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है।।
सतत साधना के बल साधक, सिर ऊँचा हो जायेगा।
कठिन परिश्रम के कारण ही, मंजिल अपनी पायेगा।।
अपने बाप का क्या कम होगा, गर थोड़ी मेहनत कर लो।
मेहनत के बल खाली वाली, तुम झोली अपनी भर लो।।
कठिन काम को करने को खुद को देना मंजूरी है।
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है।।
पक्की धुन के रहना बिल्कुल, चाहे कोई कुछ बोले।
सोच लिया तो होकर होगा, मतवाले का तन डोले।।
जलती भट्टी में तपकर पकती रोटी तंदूरी है।
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है।।
जीवन जीवन है ना भूलो, भूल भुलैया में तुम तो।
वन वन में भटकोगे वरना, ताज रखा सर पर ही हो।
छिपी हुई अंदर में तेरे, मृग तेरी कस्तूरी है।
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है।।
अटल रखो विश्वास खुदी पर, साधक संयम मत तोड़ो।
बनके रहना ‘सरल’ सहज तुम, अंधी दौड़ में मत दौड़ो।।
संयम के पालन को बन्दे, मत बोलो मजबूरी है।
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है।।
#साहेबलाल ‘सरल’
परिचय-
 नाम- साहेबलाल दशरिये ‘सरल’
 शिक्षा- M.A. (English, History.), बी. एड.
सम्प्रति- व्याख्याता
पूरा पता- बालाघाट (मध्यप्रदेश)
प्रकाशित कृति-
(i) अभिव्यक्ति भावों की काव्य संकलन 2011
(ii) ये बेटियां 2012
(iii) रानी अवंतीबाई की बलिदानगाथा 2013
9. प्रकाशन- अनेकों पत्र पत्रिकाओं में अनेकों रचनाओं का प्रकाशन।
10. उपलब्धि- अनेकों साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मान एवं देश के अनेकों मंचो पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों में कवितापाठ।
 

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