धर्म ग्रन्थ कुछ भी पढो पढो मानवता का पाठ सबसे बड़ा एक ही धर्म मानव सेवा जन कल्याण राष्ट्रधर्म उससे भी बड़ा जरूरत पड़े तो दे बलिदान सभी धर्म एकता सिखाते भाईचारे का पाठ पढ़ाते और देते रूहानियत का ज्ञान जैन धर्म से अहिंसा सीखो हिन्दू धर्म से सहिष्णुता मुस्लिम […]

आज आपका गुड बाय मेल पड़कर कुछ ख़ुशी तो कुछ दुःख हुआ। परन्तु दुःख को भूलकर  हमें ख़ुशी का ही साथ देना होगा क्योकि प्रक्रति का नियम है की जो आते है तो उसे जाना भी पड़ता है । जीवन एक नदी की तरह है जो हमेशा ही बहता रहता […]

इशक  करके तुमसे ,ख़ाक में मिल गये। कहकहे लगाते लब ,जैसे कि सिल गये। आवारगी का आलम ,हम बताये भी कैसे खेल खेल में बस,ऐसे  कितने ही  दिल गये। हुस्न पर मरने वालो की अदा खास है यारो अक्ल वाले ही होते  बस ग़ाफ़िल गये ज़ौक़ ऐ तमन्ना  की क्या […]

मजदूर से दूरी क्यों? होती क्यों दूर व्यवस्थाएँ? जबकि वो तो स्तंभ है प्रगति की रोज बनाते नव आकार इनके हाथों से सजी हर वो महल की दर-ओ- दिवार। मजबूरी इनका पीछा न छोड़े मजदूरी करते दिन-रात देश-परदेश की मिट्टी मे रहकर सजते- संवारते अपने हालात। जरूरत की श्रृंगार से […]

   परिवार में जिनकी आयु साठ वर्ष हो गए या जिनकी सेवानिवृति हो गई। वे वरिष्ठ नागरिक कहलाते हैं। वरिष्ठ जन ही परिवार की नींव होती है। लेकिन आज की पीढ़ी वरिष्ठ के साथ रहना पसन्द नहीं करते। वे एकल परिवार में स्वतंत्रता के साथ रहना चाहते हैं। किसी की […]

भावना और भाव, दोनों में अंतर है / प्यार और प्यास, दोनों आपस में, क्या एकदूसरे के पूरक है। मै कुछ समझा, और न समझा। मुझे कुछ ज्ञात ही, नही हो रहा है।। शायद आप ही,  समझा सके अब हमें। लेकर यही आस, आये है आपके पास। की रुबा रू […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।