अजब सा नशा छाया है और खुमार हुआ है मुझे, लो अब मैं चीख़कर कहता हूं प्यार हुआ है मुझे, रात भर अब करवटें बदल कर सोने लगा हूं, हां अब उसका बनकर उसमें ही खोने लगा हूं, बेचैन रहती है नज़रे मेरी तुझे देखने की खातिर, इश्क़-ए-सफ़र के सफ़र […]
राघव कुटीर में समा गए सत्यमित्रानन्द महाराज ज्ञान,धर्म, अध्यात्म के थे पथप्रदर्शक संवाहक शंकराचार्य के रूप में समन्वयवाद की फैराई पताका भारतमाता का मन्दिर बनाकर राष्ट्रभक्ति से जुड़ गया नाता निर्धन,असहायों के पालक थे सन्त समाज के साधक थे पवित्रता की प्रति मूर्ति विकार मुक्त देवत्व थे शरीर छोड़कर चले […]
