चेहरे पर मुस्कान रह सके ऐसा सद्कर्म कीजिए पीड़ित हो अगर कोई दुख उसका हर लीजिए संवेदना मानवीय गुण है धारण इसको कर लीजिए अच्छा सोचकर आगे बढ़ो सुधार स्वयं में कर लीजिए परमात्मा चाहते है सबसे जीवन व्यर्थ न कीजिए जो भी सांसे मिली प्रभु से उनको हंसकर जी […]
संस्कृति की जन्भदात्री है, यह हमारा देश। अलग-अलग धर्म है,तनिक भी नहीं द्वेष।। ऋषि मुनि गुरूजन का , संस्कृत था प्राण। रचते-रचते रच दिए,कितने ही वेद-पुराण।। धरा रही दानवों की,भूल गयी संस्कृति। हिंसात्मक न सोच हो, ना फैलेगी विकृति।। संस्कृत से समाज का,कालान्तर से उद्धार। नित-दिन उजागर हो,सभ्यता का द्वार।। […]
