अगर तुम मचलना नही जानते हो, तो फिर इश्क़ करना नही जानते हो, ये गिर कर संभलने की बाते है झूठी, कभी जान अटकी कभी साँस टूटी, अगर दर्द सहना नही जानते हो, तो फिर इश्क़ करना नही जानते हो, सारे गमों को समेट साथ लेकर के चलना, कभी खुद […]
आचार्य हेमचंद्र ने समस्त व्याकरण वांड्मयका अनुशीलन कर शब्दानुशासन एवं अन्य व्याकरण ग्रंथोकी रचना की। पूर्ववतो आचार्योंके ग्रंथोका सम्यक अध्ययन कर सर्वांड्ग परिपूर्ण उपयोगी एवं सरल व्याकरणकी रचना कर संस्कृत और प्राकृत दोनों ही भाषाओंको पूर्णतया अनुशासित किया है। हेमचंद्रने ‘सिद्वहेम’ नामक नूतन पंचांग व्याकरण तैयार किया। इस व्याकरण ग्रंथका […]
