आते हैं जब इस दुनिया में हम, कितने सहज,सौम्य और निश्छल होते हैं। धीरे-धीरे होते हैं प्रभावित और अपनाने लगते हैं, उस वातावरण को,जो कराता है हमसे मनमानी, बनाता है क्रमशः हमको मगरूर। सिखाने लगता है दुनियादारी और, बोने लगता है मन में हमारे बीज मगरूरता के, करते रहने को […]
