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  जल आपदा बढ़ता गया, जीवन यहाँ घटने लगा। धरती कभी बगिया रही, केरल वही पटने लगा। सौ साल में वर्षा नहीं, ज्यादा जलद फटने लगा। जलमग्न ये दक्षिण धरा, संपर्क अब कटने लगा। सैनिक बहादुर हैं बड़े, डरते नहीं सैलाब से। विपदा उपर से बरसती, कमतर कहाँ तेजाब से। […]

मै नारी हूं। मै नारी हूं । मै सारी सृष्टि से न्यारी हूं । मैं वो हूँ जो तज नही सकती , अपने न्यायाचित अधिकार । मैं वो हूँ जो नही सह सकती , शीश झुकाकर अत्याचार । मैं निर्भय हो बरसा सकती , सत्य के दहकते हुये अंगार । […]

मन कभी चंचल कोमल मन कभी गहन चिंतन में लिप्त कभी अनंत गहराइओ में खोया कभी पक्षी समान भरे उड़ान मन की बाते आँखो की भाषा कुछ नयी अभिलाषा मन पल में अनंत गहराइयां छू जाये मन पल में विचलित पल में स्थिर हो जाये मन की बाते जानना बहुत […]

अनन्तकाल से ही मानव की इच्छा रही है कि वह प्रसिद्ध हो,उसके पास धन-दौलत हो,उसे मान-सम्मान प्राप्त हो,लोग उसे जाने पहचानें। तब से ही मानव इन सबको प्राप्त करने के प्रयास में रहा है और इसके लिए न जाने क्या-क्या करता रहा है ?,और आज भी कर रहा है। आजकल […]

जैसा कि,हम सभी जानते हैं हमारी भूमि (भारत देश)ऋषि मुनियों,ज्ञानियों,योगियों आदि की तपो भूमि रही है। कहा जाता है कि,`कण-कण में भगवान बसते हैं`,ये बात कितनी सही है,पता नहीं। वैसे अगर परमाणुवाद की दृष्टि के सिध्दान्त से देखा जाए तो यह बात सत्य है-कण-कण में भगवान है और ऐसे ही ज्ञान।ठीक […]

याद उसकी इस कदर तड़पाने लगी, बातें उसकी बस जहन में आने लगी। सीमाओं से बँधा मन तड़प उठता, जब भी अकेलापन महसूस होता। बंदिशों पर सख्त पहरे लगे थे, जब भी तोड़ी कमरे में कैद आवाज मिली। कभी कप टूटा,कभी प्यालियों की आवाज, कानों को बेहिसाब मिली। कभी टमाटर […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।