मेरे साथ अगर संभव हो जागो मेरे साथी, प्रेम का दिल में नव उद्भव हो जागो मेरे साथी! ००० शक्ति ज़िन्दगी में है प्यारे सचमुच बहुत ज़रूरी, शक्ति बिना ख़ुद शिव भी शव हो जागो मेरे साथी! ००० दो पहियों पर चलती गाड़ी चाहे धीमे-धीमे, मिले साथ तो जीवन नव […]

सुना है अब मेरे गांव के, सारे बच्चे बड़े हो गए… कोई हिन्दू तो कोई, मुसलमान हो गए… खैर ये तो मजहब की बात है, पर वे बड़े छुपे रुस्तम से हो गए… यकायक ही एक दुजे के, वो दुश्मन से हो गए… पलट कर देखा जब जिदंगी को, कुछ […]

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हे नारी,क्यों तुम ऐसी हो… निर्मल गंगा जैसी हो, हे नारी,क्यों तुम ऐसी हो…। अपने गुण से, अपने सौंदर्य से सबको मोहने लगती हो, हे नारी,क्यों तुम ऐसी हो…। सबको क्यों, तुम अच्छी लगती हो.. इसमें कोई शक नहीं.. कि तुम बड़ी अच्छी लगती हो… मन में बनकर चाहत… बड़ी […]

प्रिय सत्रह साल के दिसम्बर एक गुजारिश है तुझसे, वैसे मांगने की कोई जरुरत नईं , पर मेरी इंसानी फितरत ही है… किसी-न-किसी से कुछ-ना-कुछ, मांगते ही रहने की माता से,पिता से, भाईयों से,बहनों से,दोस्तों गुरूजनों से,अनाकलनीय शक्ति से, भगवान से,ईश्वर से,अल्लाह से… परमपिता से,और न जाने किस-किस से… लेकिन […]

अपने पुरखों को पन्द्रह दिन में याद कर लेना। अपनी अंजुलि में तिल के साथ नीर भर लेना॥ श्राद्ध तर्पण करो पितरों को, तृप्त कर कर के। पुण्य का काम है कर्तव्य बोध कर लेना॥                               […]

व्राह्मण कुल गौरव भगवान परशुराम जी के, जन्म दिवसोत्सव पर बार -बार वन्दना। शिव के महान भक्त विजया कमानधारी, सती रेणुका के पूत बार-बार वन्दना।। ऋषि जमदग्नि जी के अंशज महान वीर, कर में कुल्हाड़ी जिनके बार – बार वन्दना।। गाय गुरु रक्षा हित क्षत्रिय कुल द्रोही, भगवान परशुराम जी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।