सफर में मिलते तो बहुत है / परन्तु पुन: कम ही मिलते है / और जो पुन: मिलते है / तो फिर वो बार बार मिलते है / अपनी खुद की पहचान बनाओ / जो बहुत मुश्किल से बनती है / नाम मिटने वाले बहुत मिल जायेंगे / और ख्याति […]

जब तक सांसे चलती है गुरुदेव की महिमा गाऊ / सपने में गुरु को देखु जागू तो दर्शन पाऊ / जब माया मोह में उलझा मन ने मुझे समझाया / तब हाथ पकड़कर गुरु ने मुझे सत्य का पथ दिखलाया / गुरु चरणों को में तज कर अब और कहाँ […]

गुरु विद्यासागर के चरणों में हम सब / श्रीफल चढ़ाने आये है मुंबई से / यही भावनाये लिए है हम सब यहाँ खड़े  / गुरु दर्शन मिल जाये हम सब को / गुरु विद्यासागर के चरणों में हम सब / श्रीफल चढ़ाने आये है मुंबई से / जो निश दिन […]

स्कूल की जब होती छुट्टी ऐसा लगता मानों बगीचे में उड़ रही हो रंग -बिरंगी तितलियाँ  । तुतलाहट भरी मीठी बोली से पुकारती अपने पापा को पापा … इतनी सारी नन्ही रंग -बिरंगी तितलियों में मुझे ढुंढने लग जाती पिता की आंखे । मिलने पर उठा लेते मुझकों वे गोद […]

बेटी बचाओं ओ दुनिया वालो बाबुल करता है अब ये गुहार दुनिया रहेगी जब होगी बेटी  कहती है ये माँ की पुकार * खिल जाते है मन सभी के बिटियाँ हो हर घर सभी के दुःख दूर होगा सुख होगा पास बस करना तुम सबपे ये उपकार बेटी बचाओं ………………. […]

हमें इस संसार में लाने वाली माँ क्या अपने बच्चों का कभी भी बुरा सोच सकती है क्या / परन्तु हम सब के जीवन में कभी कभी इस तरह के हालात पैदा हो जाते है की हमें उस समय निर्णय करना बहुत ही भरी पड़ जाता है / और हम […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।